ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती को लेकर कांग्रेस ने तंज कसा कि यह हाल ही में विधानसभा चुनावों में मिली जीत के बाद भाजपा का लोगों को रिटर्न गिफ्ट है। पार्टी महासचिव व मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि देश की 84 फीसदी लोगों की आमदनी में कमी आई है। क्या चुनावी जीत के आधार पर करोड़ों कर्मचारियों की बचत यह हमला करना सही है? ईपीएफओ ने पीएफ जमा पर मिलने वाली ब्याज दरों में कटौती करते हुए इसे दस साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। क्या यही भाजपा की जीत का रिटर्न गिफ्ट है?
फैसले पर पुनर्विचार करें वित्तमंत्री: भाकपा
भाकपा सांसद बिनॉय विश्वम ने वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती के फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर कामकाजी वर्ग को मरने के लिए छोड़ने का आरोप लगाया।
वित्तमंत्री को लिखे खत में बिनॉय ने आरोप लगाया कि हाल के विधानसभा चुनावों में मिली जीत के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अपना असली रंग दिखा दिया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती का फैसला न केवल गैर जिम्मेदारपूर्ण है बल्कि यह सरकार की देश के कामकाजी वर्ग के प्रति नजरिये को भी दिखाता है।
उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री बिना की वाजिब वजह व तर्क के लगातार ईपीएफओ पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव बना रही थी। एक संगठन के तौर पर उसका उद्देश्य देश के कामकाजी वर्ग को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना होना चाहिए लेकिन यह कटौती अनुचित है।
ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती कामकाजी लोगों पर हमला: येचुरी
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने शनिवार को ईपीएफ ब्याज दरों में कटौती को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि यह कामकाजी लोगों पर सरकार का हमला है। उन्होंने ट्वीट किया कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मोदी सरकार ने प्रतिशोध में मेहनतकश लोगों पर हमला किया है। सभी लोग बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई के समय में हुए इस हमले का पूरी ताकत से विरोध करें।