पारदर्शिता और निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए वैश्विक आधार रेखा को विकसित करना होगा और उद्योगों को नई चुनौतियों व नियमों के अनुसार, खुद को ढालने का प्रयास करना होगा। विकास कार्यों में अनुकूलन शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए। यह बात पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की सचिव लीना नंदन ने कही। उन्होंने शनिवार को कॉप 27 में एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) की ओर से आयोजित एक सत्र में यह बात रखी।
उन्होंने कहा, संस्थागत व्यवस्थाओं, कार्य योजनाओं और संसाधन जुटाने के तौर-तरीकों में सामंजस्य स्थापित करना और इन्हें एक रूप दृष्टि से देखना होगा। उन्होंने अनुकूलन के लिए समुदायों को मजबूत करने के लिए सूचना प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। कहा, हमें पीपीपी के अर्थ को प्रो प्लेनेट पीपुल के रूप में दोबारा परिभाषित करने की जरूरत है। अब हमें सही दिशा में आगे बढ़ने और काम करने की जरूरत है।