जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने 11 नवंबर को पारित आदेश में याचिकाकर्ता मोहन चंद्र पी. के साथ अधिवक्ता विपिन कुमार जय को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता और उसकी ओर से याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता को यह कहते हुए नोटिस जारी किया है कि अगर याचिका में न्यायाधीशों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की गई है तो वादियों की ओर से याचिका दायर करने वाले वकील अदालती कार्यवाही की अवमानना के लिए जिम्मेदार होंगे।
विज्ञापन
जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने 11 नवंबर को पारित आदेश में याचिकाकर्ता मोहन चंद्र पी. के साथ अधिवक्ता विपिन कुमार जय को नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। दोनों को सुनवाई की अगली तारीख 2 दिसंबर, 2022 को हाजिर रहने को भी कहा गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका में की गईं टिप्पणियां न केवल कर्नाटक हाईकोर्ट के लिए अपमानजनक हैं बल्कि प्रकृति में अत्यधिक अवमाननापूर्ण भी हैं।
यह था मामला
शीर्ष अदालत कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर विशेष याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें हाईकोर्ट ने कर्नाटक में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के चयन को चुनौती देने वाली मोहन चंद्र पी की याचिका को खारिज कर दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विशेष अनुमति याचिका में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश और खंडपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए न्यायाधीशों के खिलाफ टिप्पणियां कीं और उन पर सस्ते प्रचार के लिए याचिका खारिज करने का आरोप लगाया।