सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि उसके कंधों पर पहले ही काफी बोझ और वह इसे और नहीं बढ़ाना चाहता। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में लंबित एक मामले को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को यह बात कही। शीर्ष अदालत ने कहा कि हमारे कंधों पर पर्याप्त बोझ है, इसे और नहीं बढ़ाना चाहते।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए कि हाई कोर्ट मामले को सूचीबद्ध नहीं कर रहा है, इसका मतलब यह नहीं है कि शीर्ष अदालत को इसे अपने पास स्थानांतरित कर लेना चाहिए।
याचिकाकर्ता के वकील से पीठ ने कहा कि हम अपना बोझ नहीं बढ़ाना चाहते। हमारे कंधों पर पहले से काफी बोझ है। वकील ने कहा कि मामला 2019 से उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि शीर्ष अदालत इसी तरह के एक मामले पर विचार कर रहा है और इसमें शामिल पक्ष भी वही है। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत राजमार्गों पर शराब की दुकानों से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही है, जबकि हाई कोर्ट के समक्ष लंबित याचिका राजमार्गों के पहुंच नियंत्रण से संबंधित है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि कई नए राजमार्गों पर अब पहुंच नियंत्रण है और यह महत्वपूर्ण है क्योंकि राजमार्ग गांवों और कस्बों से होकर गुजरते हैं। अदालत ने कहा कि दिल्ली-मुंबई राजमार्ग के कुछ हिस्सों को नियंत्रित किया जा रहा है। ये सभी नीतिगत मामले हैं। हम इसे स्थानांतरित नहीं करेंगे।