विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। इस मुठभेड़ में पांच नक्सली मारे गए। गढ़चिरौली पुलिस की सी-60 कमांडो टीम और सीआरपीएफ की टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।
गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने बताया कि 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के मद्देनजर नक्सली बड़ी वारदात की फिराक में थे। नक्सलियों का एक समूह पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर जंगल में एकत्र हुआ था और हमले की योजना बना रहा था। इसकी सूचना मिलने पर सी -60 कमांडो की 22 टीमों और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के दो दस्तों ने जंगल क्षेत्र में दो अलग-अलग हिस्से से नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया। जिस इलाके में यह मुठभेड़ हो रही थी, वह बस्तर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित जिले नारायणपुर की सीमा पर है।
जब पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के आने की आहट हुई तो नक्सलियों की ओर से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी गई। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और गोलीबारी में पांच माओवादी मारे गए। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने पांच शव बरामद किए हैं। लेकिन अभी इन शवों की शिनाख्त नहीं हो पाई है। वहीं, एक पुलिसकर्मी घायल हुआ है जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल, जंगल में तलाशी अभियान जारी है।
दो दिन पहले नक्सली दंपती ने किया था आत्मसमर्पण
दो दिन पहले महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में आठ लाख के इनामी नक्सली दंपती ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। दंपती की पहचान असिन राजाराम कुमार (37) उर्फ अनिल और उसकी पत्नी अंजू सुल्या जले (28) उर्फ सोनिया के रूप में हुई थी। पुलिस ने बताया कि कुमार ओडिशा में माओवादियों की प्रेस टीम का एरिया कमेटी सदस्य था। वह हरियाणा के नरवाना का रहने वाला था और हिमाचल में शिमला के पास एक इलाके में फर्जी पहचान के साथ रह रहा था।
नक्सलियों पर लगातार की जा रही कार्रवाई
विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है। पहले छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिले में 30 नक्सली मारे गये थे। 18 अक्तूबर को झारखंड के पलामू जिले में पुलिस ने नक्सलियों के हथियारों का जखीरा पकड़ा था। इसमें एके-47, एसएलआर, इंसास समेत कई हथियारों के कारतूस शामिल थे।