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Elgar Parishad: डीयू के प्रोफेसर सहित चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, दिया था भड़काऊ भाषण 

Mon, 14 Feb 2022 09:08 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, मुंबई

सार

हनी बाबू को 28 जुलाई 2020 को दिल्ली में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वह नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। 
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Elgar Parishad - फोटो : Social Media
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विस्तार
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने सोमवार को एल्गर परिषद-माओवादी लिंक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू और तीन अन्य आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश डीई कोठालीकर ने बाबू और उनके सह-आरोपी कबीर कला मंच के तीनों सदस्यों सागर गोरखे, रमेश गायचोर और ज्योति जगताप द्वारा दायर जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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बाबू को 28 जुलाई 2020 को दिल्ली में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में वह नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। जगताप, गोरखे और गायचोर को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वे हिरासत में हैं। कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार है।

मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित 'एल्गार परिषद' सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस ने दावा किया था कि शहर के कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास अगले दिन हिंसा हुई थी। 
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पुणे पुलिस ने दावा किया था कि कॉन्क्लेव को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था। मामले में एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों को आरोपी बनाया गया है। केस को बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को स्थानांतरित कर दिया गया था।

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