सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के पूर्व निर्दलीय विधायक रामबीर शौकीन को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। पूर्व विधायक साल 2018 में उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत से भाग गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि रामबीर शौकीन को चिकित्सकीय जांच के लिए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) ले जाएं।
अदालत ने उनके पिछले आचरण का संज्ञान लेते हुए कहा कि उनके पूर्व के आचरण ने गंभीर शंकाएं पैदा की हैं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने भी शौकीन को अंतरिम जमानत दिए जाने का विरोध किया। पूर्व विधायक शौकीन ने इलाज के लिए जमानत की मांग की थी।
यूपी पुलिस ने 2018 में अपनी हिरासत में रखा था। तह वह दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल से फरार हो गए थे। दिसंबर 2020 में उन्हें फिर गिरप्तार कर लिया गया था।
शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज की और उन्हें एम्स अस्पताल ले जाने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर संबंधित चिकित्सक को जरूरी लगता है तो याचिकाकर्ता की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए सर्जरी की जा सकती है। शौकीन को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत एक मामले में आरोपी बनाया चुका है।
साल 2016 में दिल्ली पुलिस ने शौकीन, नीरज बवाना और अन्य के खिलाफ मकोका के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था। इसमें उन पर एक क्राइम सिंडिकेट चलाने का और नियमित तौर पर जघन्य अपराधों में संलिप्त रहने का आरोप लगाया गया था। उल्लेखनीय है कि रामबीर शौकीन साल 2013 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली में मुंडका इलाके से विधायक बने थे।