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एलगार परिषद मामले की छह फरवरी को होगी सुनवाई, यूएपीए के तहत 11 पर हैं मामले दर्ज

Tue, 04 Feb 2020 02:17 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
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एनआईए (सांकेतिक तस्वीर)
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एलगार परिषद से जुड़े मुकदमे को मुंबई स्थित विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत में स्थानांतरित करने संबंधी मामले की अगली सुनवाई छह फरवरी को होगी। दरअसल राष्ट्रीय जांच एजेंसी के आवेदन पर जवाब देने के लिए अभियोजन और बचाव पक्ष, दोनों ने सोमवार को महाराष्ट्र की अदालत से और वक्त मांगा।

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दोनों पक्षों को सुनने के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसआर नवांदर ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख छह फरवरी तय की। विशेष सरकारी अधिवक्ता उज्ज्वला पवार ने कहा, कि उन्हें एनआईए की अर्जी संबंधी एक नोटिस कोर्ट से मिला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि क्योंकि जांच एजेंसी की ओर से कोई निर्देश नहीं मिले हैं इसलिए जवाब देने के लिए उन्हें वक्तचाहिए।
 
वहीं आरोपियों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता गौरव जाछक ने भी जवाब देने के लिए वक्त मांगा। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक एनआईए की ओर से दी गई याचिका पर नोटिस नहीं मिला है। एनआईए के नोटिस से संबंधी जो भी सूचना मिली है वह मीडिया से मिली है। वहीं जब न्यायाधीश नवांदर ने जब आरोपियों पूछा कि क्या उन्हें कोई नोटिस मिला है तो इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला है। 
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एनआईए ने पिछले हफ्ते पुणे की अदालत में आवेदन देकर एलगार परिषद मामले की सुनवाई मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी। केंद्र ने पिछले ही महीने एलगार परिषद मामले की सुनवाई पुणे पुलिस से लेकर एनआईए को सौंपी है। पुणे पुलिस ने पिछले सप्ताह एनआईए से कहा कि वह मामले के दस्तावेज पुलिस प्रमुख से आदेश मिलने के बाद ही जांच एजेंसी को सौंपेगी।

पुलिस का दावा है कि एलगार परिषद का 31 दिसंबर 2017 को शनिवरवडा में आयोजित सम्मेलन को नक्सलियों का समर्थन था और वहां दिए गए भाषण से अगले दिन कोरेगांव भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़की थी। 

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यूएपीए के तहत 11 पर मामला दर्ज

एलगार परिषद मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 11 लोगों के खिलाफ आतंक निरोधी कानून यूएपीए और आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया है। इस मामले में नौ लोग जेल में बंद है। केंद्र ने 24 जनवरी को यह मामला पुलिस से लेकर एनआईए को सौंप दिया था।

आरोपियों के अधिवक्ता सिद्धार्थ पाटिल ने बताया, हालांकि पुणे पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 124ए (देशद्रोह) लगाई थी लेकिन एनआईए की एफआईआर में यह नहीं है।। 
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