सुप्रीम कोर्ट ने एल्गार परिषद माओवादी से जुड़े मामले की आरोपी शोमा कांति सेन की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट ने एल्गार परिषद माओवादी से जुड़े मामले की आरोपी शोमा कांति सेन की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जिन्होंने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें एनआईए की विशेष अदालत का रुख करने का निर्देश दिया गया था।
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जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित
जस्टिस अनिरुद्ध बोस और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अंग्रेजी साहित्य की प्रोफेसर और महिला अधिकार कार्यकर्ता शोमा कांति सेन को 6 जून, 2018 को मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाईकोर्ट के पिछले साल 17 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे के शनिवार वाड़ा में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस का दावा है कि अगले दिन शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी। पुणे पुलिस ने दावा किया था कि सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था।
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हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पुणे द्वारा पारित नवंबर 2019 के आदेश को चुनौती देने वाली सेन की याचिका पर विचार किया था, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। शोमा कांति सेन ने हाईकोर्ट के समक्ष दावा किया था कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया था।