अदालत ने कहा कि मौत तो मौत है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि मृतक कैसी गतिविधियों में लगा था। हो सकता है, वह गलत गतिविधियों में लगा था, लेकिन आनंद का भाई था।
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एल्गर परिषद मामले के आरोपी आनंद तलतुंबड़े को उनके भाई कथित नक्सल नेता मिलिंद तलतुंबड़े की मौत के मद्देनजर दो दिन के लिए अपनी मां के पास चंद्रपुर जाने की अनुमति दे दी है। आनंद इन दिनों नवी मुंबई की तालोजा जेल में बंद हैं।
विज्ञापन
जस्टिस एसबी शुक्रे और जीए सनप ने वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद पिछले साल नवंबर में एक मुठभेड़ में उनके भाई मिलिंद की मौत के मद्देनजर आनंद को पुलिस सुरक्षा में 8 व 9 मार्च के बीच मां के पास जाने की अनुमति दी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के वकील संदेश पाटिल ने यह कहते हुए याचिका का विरोध किया कि मिलिंद कुख्यात माओवादी नेता था और गैरकानूनी गतिविधियों में लगा था।
अदालत ने कहा कि मौत तो मौत है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि मृतक कैसी गतिविधियों में लगा था। हो सकता है, वह गलत गतिविधियों में लगा था, लेकिन आनंद का भाई था। आनंद 8 मार्च की सुबह या दोपहर चंद्रपुर पहुंचेंगे। अपनी मां से मिलने के बाद वे 10 मार्च को मुंबई रवाना होंगे। 10 मार्च को भी समय बचा तो वे अपनी मां के साथ बिता सकेंगे। उन्हें 11 मार्च को तालोजा जेल पहुंचना होगा।