अदालत ने कहा कि जब से उसने एल्गार परिषद के आरोपी को एक निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी है तब से महाराष्ट्र संगठित अपराध अधिनियम तथा स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत आरोपित व्यक्तियों की याचिकाओं की बाढ़ आ गयी है।
महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद -माओवादी लिंक मामले में आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हनी बाबू की याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में हनी बाबू ने चिकित्सा देखभाल की मांग की थी। गौरतलब है कि अदालत ने पिछले महीने हनी बाबू को शहर के एक अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन और चिकित्सकीय जांच की अनुमति दी थी।
विज्ञापन
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस ए एस गडकरी और पी डी नाइक की खंडपीठ को सूचित किया गया कि आरोपी की सर्जरी की गई है। सुनवाई के दौरान बाबू के अस्पताल से छुट्टी के कागजात देखने के बाद अदालत ने कहा कि आगे कुछ भी नहीं बचा है। जिसके बाद याचिका को खारिज कर दिया गया ।
अदालत ने कहा कि जब से उसने एल्गार परिषद के आरोपी को एक निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी है तब से महाराष्ट्र संगठित अपराध अधिनियम तथा स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत आरोपित व्यक्तियों की याचिकाओं की बाढ़ आ गयी है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि हनी बाबू पिछले करीब दो सालों से नवी मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि निजी ब्रीच कैंडी अस्पताल में मोतियाबिंद की सर्जरी कराने तथा पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द एवं जोड़ों में दर्द का उपचार कराने के लिए उन्हें तीन महीने की जमानत की जरूरत है।