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Election: 1952 से रायबरेली-अमेठी से चुनाव लड़ रहा गांधी परिवार, जानें कब-कब मिली जीत और कब हुई हार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जयदेव सिंह Updated Tue, 14 Mar 2023 07:26 PM IST

सार

2024 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी के चुनाव नहीं लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि ऐसा होने पर रायबरेली सीट से सोनिया गांधी की बेटी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी यहां से चुनाव लड़ सकती हैं।
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गांधी परिवार - फोटो : AMAR UJALA
2024 के चुनाव से पहले सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारी में लग चुकी हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी सभी दल जोरशोर से तैयारी में लगे हैं। कोई 2019 में हारी सीटों पर जीत दर्ज करने का फॉर्मूला खोज रहा है तो कोई उप-चुनाव में मिली जीत के फॉर्मूले को हर सीट पर लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसी सूची में कांग्रेस भी शामिल है। पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल रहने वाली दो सीटों अमेठी और रायबरेली को लेकर खबरें आने लगी हैं।

पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों की मानें तो ये दोनों सीटें गांधी परिवार अपने पास ही रखेगा। सोनिया गांधी के न लड़ने पर रायबरेली से प्रियंका भाग्य आजमाएंगी। राहुल गांधी का अमेठी से उतरना भी करीब-करीब तय माना जा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल की हार और कांग्रेस के रायपुर अधिवेशन में सोनिया गांधी के बयान से इन सीटों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 


आइये जानते हैं इन दोनों सीटों का चुनावी इतिहास क्या रहा है? कब-कब इन सीटों पर गांधी परिवार के सदस्य चुनाव मैदान में उतरे। कब इन्हें जीत मिली और कब हार का सामना करना पड़ा? पिछले चुनाव में इन दोनों सीटों पर क्या हुआ था? अलगे चुनाव में क्या हो सकता है?
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गांधी परिवार - फोटो : AMAR UJALA
2024 के चुनाव से पहले सभी पार्टियां अपनी-अपनी तैयारी में लग चुकी हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी सभी दल जोरशोर से तैयारी में लगे हैं। कोई 2019 में हारी सीटों पर जीत दर्ज करने का फॉर्मूला खोज रहा है तो कोई उप-चुनाव में मिली जीत के फॉर्मूले को हर सीट पर लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसी सूची में कांग्रेस भी शामिल है। पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल रहने वाली दो सीटों अमेठी और रायबरेली को लेकर खबरें आने लगी हैं।

पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों की मानें तो ये दोनों सीटें गांधी परिवार अपने पास ही रखेगा। सोनिया गांधी के न लड़ने पर रायबरेली से प्रियंका भाग्य आजमाएंगी। राहुल गांधी का अमेठी से उतरना भी करीब-करीब तय माना जा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल की हार और कांग्रेस के रायपुर अधिवेशन में सोनिया गांधी के बयान से इन सीटों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 

आइये जानते हैं इन दोनों सीटों का चुनावी इतिहास क्या रहा है? कब-कब इन सीटों पर गांधी परिवार के सदस्य चुनाव मैदान में उतरे। कब इन्हें जीत मिली और कब हार का सामना करना पड़ा? पिछले चुनाव में इन दोनों सीटों पर क्या हुआ था? अलगे चुनाव में क्या हो सकता है?

फाइल फोटो: संजय गांधी - फोटो : Social Media
1977 से गांधी परिवार अमेठी में सक्रिय
1977 में पहली बार गांधी परिवार के किसी सदस्य ने अमेठी सीट से चुनाव लड़ा। इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी यहां से कांग्रेस उम्मीदवार बनाए गए। जनता लहर में संजय गांधी को हार का सामना करना पड़ा था। तीन साल बाद 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में संजय गांधी एक बार फिर इस सीट से उतरे। इस बार उन्होंने 1977 में रवींद्र प्रताप सिंह से मिली हार का बदला ले लिया। अगले ही साल संजय गांधी का निधन होने के बाद हुए उप चुनाव में संजय के बड़े भाई राजीव गांधी यहां से जीते। 

1981 के बाद 1984, 1989 और 1991 में भी इस सीट से राजीव गांधी को जीत मिली। हालांकि, 1991 के चुनाव के दौरान राजीव गांधी की हत्या हो गई। इसके बाद हुए उप-चुनाव में यहां से कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा जीते। शर्मा को 1996 में भी इस सीट पर जीत मिली। हालांकि, 1998 में उन्हें भाजपा के संजय सिंह ने हरा दिया था। 

एक चुनावी रैली के दौरान छोटी बच्ची से मिलते राजीव गांधी - फोटो : सोशल मीडिया
1984 में गांधी परिवार के दो सदस्यों में हुई थी टक्कर
1984 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से कांग्रेस ने राजीव गांधी को टिकट दिया था। वहीं, राजीव के छोटे भाई संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी निर्दलीय यहां से चुनाव मैदान में उतरी थीं। हालांकि, मेनका को बहुत बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। राजीव गांधी को जहां साढ़े तीन लाख से ज्यादा वोट मिले वहीं, मेनका गांधी को महज 50 हजार वोट से संतोष करना पड़ा।

मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी - फोटो : Social Media
सोनिया और राहुल गांधी ने भी यहीं से शुरू की चुनावी सियासत
सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने अमेठी से ही चुनावी राजनीति में कदम रखा था। राजनीति में आने के बाद 1999 में सोनिया ने पहली बार चुनाव लड़ा। राजीव की तरह ही सोनिया ने भी अमेठी से चुनाव लड़ा और जीता। 1999 में सोनिया तो 2004 में राहुल गांधी ने चुनावी राजनीति में कदम रखा। राहुल भी अमेठी से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की।  

2004 के बाद 2009 और 2014 में भी राहुल गांधी ने अमेठी सीट से जीत दर्ज की। 2019 में राहुल अमेठी के साथ केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़े। राहुल अमेठी से हार गए। हालांकि, वायनाड से उन्हें जीत मिली। अब 2024 में फिर से उनके अमेठी से चुनावी मैदान में उतरने की बात कही जा रही है।

रायबरेली और गांधी परिवार का रिश्ता 
गांधी परिवार की चुनावी राजनीति में अमेठी से ज्यादा पुराना संबंध रायबरेली सीट से है। 1952 के पहले लोकसभा चुनाव से 2019 के 16वीं लोकसभा चुनाव तक यहां से कुल 11 बार नेहरू गांधी परिवार के किसी न किसी सदस्य ने यहां से चुनाव लड़ा। 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में रायबरेली और प्रतापगढ़ जिलों को मिलाकर एक लोकसभा सीट थी। उस चुनाव में यहां से इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी कांग्रेस के टिकट पर लड़े और जीते थे। 1957 में रायबरेली सीट अस्तित्व में आई तो यहां से एक बार फिर फिरोज गांधी सांसद बने।

इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी - फोटो : फाइल फोटो
फिरोज गांधी के निधन के बाद इंदिरा ने रायबरेली से लड़े चार चुनाव
1960 में फिरोज गांधी का निधन हो गया। इसके बाद हुए उप चुनाव और 1962 के चुनाव में यहां से गांधी परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ा। 1967 में इंदिरा गांधी ने इस सीट से चुनाव लड़ीं और जीतीं। इसके बाद उन्होंने 1971 में भी यहां से चुनाव जीता। 1977 की जनता लहर में इंदिरा को रायबरेली सीट से हार का सामना करना पड़ा। उन्हें जनता पार्टी के राजनारायण ने हराया। 1980 में एक बार फिर इस सीट से इंदिरा जीतने में सफल रहीं। इस चुनाव में इंदिरा रायबरेली के साथ ही आंध्र प्रदेश की मेंडक (अब तेलंगाना में) सीट से भी जीतीं। चुनाव के बाद उन्होंने रायबरेली सीट से इस्तीफा दे दिया और मेंडक की सांसद बनी रहीं।

इंदिरा ने 1980 में रायबरेली की जगह मेंडक को चुना तो परिवार के ही सदस्य को थमाई विरासत
इंदिरा के इस्तीफे के बाद  इस सीट पर हुए उप-चुनाव में नेहरू-गांधी परिवार से संबंध रखने वाले अरुण नेहरू यहां से कांग्रेस के टिकट पर जीते। 1984 में भी उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की। हालांकि, 1989 में कभी प्रधानमंत्री राजीव गांधी के खास रहे अरुण नेहरू जनता दल में चले गए और उत्तर प्रदेश की ही बिल्हौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़े और जीते।

सोनिया गांधी - फोटो : SOCIAL MEDIA
2004 से इस सीट से जीत रहीं हैं सोनिया गांधी
1989 से 1999 तक हुए हुए पांच लोकसभा चुनावों में यहां से गांधी परिवार को कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ा। 2004 में जब राहुल गांधी ने चुनावी राजनीति में कदम रखा तो सोनिया गांधी ने अमेठी सीट उनके लिए छोड़ दी और खुद रायबरेली से चुनाव लड़ने लगीं। 2004 के बाद 2009, 2014 और 2019 में भी इस सीट से सोनिया गांधी को जीत मिली।

सोनिया गांधी, प्रियंका और राहुल - फोटो : Social Media
…तो प्रियंका संभालेंगी परिवार की विरासत 
2024 के लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी के चुनाव नहीं लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। कहा जा रहा है कि ऐसा होने पर रायबरेली सीट से सोनिया गांधी की बेटी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी यहां से चुनाव लड़ सकती हैं। सक्रिय राजनीति में आने से पहले से प्रियंका अमेठी और रायबरेली सीट से मां सोनिया और भाई राहुल गांधी का चुनावी प्रबंधन देखती रही हैं।
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