पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान अधिकारियों के तबादलों को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि मतदाता सूची से जुड़े अधिकारियों के तबादले आयोग की पूर्व अनुमति के बिना किए गए, जो उसके निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। इससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
चुनाव आयोग ने इसे गंभीर क्यों माना?
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राज्य सरकार को क्या संदेश दिया?
आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान उसके आदेशों का सख्ती से पालन होना चाहिए। आयोग का कहना है कि मुख्य सचिव की जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि आयोग से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला उसकी अनुमति के बिना न हो। यह पत्र नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन से स्पीड पोस्ट और ई-मेल के जरिए भेजा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, अगर राज्य सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो चुनाव आयोग और कड़े कदम उठा सकता है। माना जा रहा है कि यह मामला बंगाल में प्रशासन और चुनाव आयोग के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है। आने वाले दिनों में इस पर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और आयोग की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
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