एकनाथ शिंद से मुलाकात करने पहुंचे बाल ठाकरे के पोते निहार ठाकरे।
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मुलाकात पर शिंदे का क्या कहना है?
निहार से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ट्वीट किया, 'शिव सेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के पोते और बिंदु माधव ठाकरे के पुत्र निहार ठाकरे ने आज मुलाकात की। उन्होंने गठबंधन सरकार के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। उनका स्वागत और उनके भविष्य के सामाजिक और राजनीतिक करियर के लिए शुभकामनाएं।'
क्या ये शिंदे गुट की शिवसेना पर कब्जे का नया प्लान है?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि निहार ठाकरे के जरिए शिंदे गुट यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि शिवसैनिक ही नहीं उद्धव के साथ उनका परिवार भी नहीं है। इससे पहले जयदेव ठाकरे की पूर्व पत्नी स्मिता ठाकरे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चुकी हैं। माना जा रहा है कि ये मुलाकातें शिंदे गुट की ओर से शिवसेना पर कंट्रोल पाने के नए प्लान का हिस्सा हो सकती हैं।
हालांकि, महाराष्ट्र की राजनीति को जानने वाले लोग कहते हैं कि निहार हों या जयदेव ठाकरे या फिर राज ठाकरे ये सभी लंबे समय से उद्धव के परिवार से दूर हैं। बाल ठाकरे के निधन के बाद स्मिता ठाकरे का भी उद्धव ठाकरे के साथ रिश्ता वैसा नहीं रहा जैसा बाल ठाकरे के वक्त था।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात करने पहुंची स्मिता ठाकरे।
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शिंदे से मुलाकात करने वाली स्मिता का उद्धव से क्या रिश्ता?
स्मिता ठाकरे उद्धव ठाकरे के बड़े भाई जयदेव ठाकरे की दूसरी पत्नी रही हैं। स्मिता समाजसेवी और फिल्म निर्माता हैं। वह राहुल प्रोडक्शंस और मुक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष और संस्थापक हैं। उनकी संस्था महिला सुरक्षा, एचआईवी/एड्स जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में काम करती है।
स्मिता बॉलीवुड की पार्टियों में भी अक्सर नजर आती हैं। स्मिता और जयदेव के दो बेटे राहुल और एश्वर्य हैं। हालांकि, स्मिता और जयदेव का 2004 में तलाक हो चुका है। स्मिता से तलाक के बाद जयदेव और बाला साहेब ठाकरे के रिश्ते खराब हो गए थे।
इस तलाक के बाद स्मिता जहां अपने ससुराल वालों के साथ मातोश्री में रहती रहीं वहीं, जयदेव परिवार से अलग रहने लगे। तलाक के बाद जयदेव ने तीसरी शादी अनुराधा से की। अनुराधा और जयदेव की एक बेटी माधुरी है। इससे पहले जयदेव जयश्री केलकर के साथ भी शादी कर चुके थे। जिनसे उनका एक बेटा जयदीप है।
आमतौर पर सुर्खियों से दूर रहने वाले जयदेव ठाकरे पिता के निधन के वक्त सार्वजनिक तौर पर नजर आए थे। इसके बाद परिवार से संपत्ति विवाद के चलते सुर्खियों में रहे थे। हालांकि, बाद में उन्होंने ये केस वापस ले लिया था। दरअसल बाला साहेब ने अपनी वसीयत में जयदेव को कुछ भी नहीं दिया था। जयदेव ने वसीयत को गलत बताते हुए कहा कि उनके पिता की ‘मानसिक स्थिति ठीक नहीं’ थी और भाई उद्धव ठाकरे का उन पर प्रभाव था।
मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे
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अटकलें तो राज ठाकरे के साथ आने की थी उसका क्या हुआ?
उद्धव के चचेरे भाई राज ठाकरे की भी एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। कहा जा रहा है कि राज की पार्टी मनसे शिंदे सरकार का हिस्सा हो सकती है। इसके साथ ही राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे को शिंदे कैबिनेट में मंत्री बनाया जा सकता है। अमित पिता के साथ राजनीतिक मंचों पर भी नजर आते रहे हैं।