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Nimisha Priya: निमिषा को बचाने की कोशिशों में कई अड़चनें, भारतीय नर्स पर लगे गंभीर आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल

Sun, 13 Jul 2025 09:49 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Nimisha Priya: निमिषा प्रिया को यमन में 16 जुलाई को फांसी दी जा सकती है। यह मामला न सिर्फ कानूनी, बल्कि मानवीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेहद संवेदनशील बन चुका है। अब सबकी नजरें भारतीय अदालत और सरकार पर टिकी हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : मेटा एआई
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विस्तार
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यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को एक व्यक्ति की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। उन पर लगे आरोप इतने गंभीर हैं कि उन्हें राहत दिलाने की कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, निमिषा को 16 जुलाई को फांसी दी जा सकती है।
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क्या है पूरा मामला?
निमिषा प्रिया, जो केरल की रहने वाली हैं, साल 2008 से यमन में नर्स का काम कर रही थीं। शादी के बाद 2011 में वे अपने पति टॉमी थॉमस के साथ यमन गईं। लेकिन 2014 में यमन में गृहयुद्ध शुरू होने पर उनका पति और बेटी भारत लौट आए, जबकि निमिषा वहीं रहीं। बताया गया है कि जुलाई 2017 में निमिषा ने अपने स्थानीय बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो मेहदी को नींद की दवा देकर मार डाला और फिर एक अन्य नर्स की मदद से उसका शव टुकड़ों में काटकर एक टैंक में छुपा दिया। जांच के दौरान निमिषा को गिरफ्तार किया गया और कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार, उन्होंने हत्या की बात कबूल की थी। सना की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई।

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यमन में नियम और निमिषा ने कैस की हत्या?
यमन के कानून के तहत देश के बाहर का कोई भी शख्स देश में किसी स्थानीय व्यक्ति के साथ साझेदारी करने के बाद ही कारोबार कर सकता है। इसलिए निमिषा ने साझेदारी और अन्य शर्तों पर सहमति जताई। निमिषा ने 2015 में मेहदी के साथ क्लिनिक शुरू किया। हालांकि, धीरे-धीरे उनमें मनमुटाव होने लगे। उन्होंने मेहदी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। बताया गया कि मेहदी ने निमिषा का पासपोर्ट भी ले लिया था, ताकि वह यमन छोड़कर न जा सके। निमिषा ने मेहदी के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। 2016 में मेहदी को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में छूट गया। इसी के बाद निमिषा ने मेहदी की हत्या की।

कानूनी प्रयास नाकाम
निमिषा ने यमन की सर्वोच्च अदालत में अपील की, लेकिन कोर्ट ने उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा। बाद में उन्होंने राष्ट्रपति से दया याचिका की, मगर वह भी खारिज कर दी गई। सूत्रों के अनुसार, मृतक तालाल मेहदी के परिवार ने मुआवजा लेकर माफी लेने से भी इनकार कर दिया है। ऐसे में अब तक की सभी कानूनी कोशिशें असफल रही हैं।

भारत में तेज हुई आवाजें
निमिषा की मां और सामाजिक संगठनों ने भारत सरकार से राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की है। विशेषकर केरल के राजनीतिक दलों और संगठनों ने इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा है कि वे मामले पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और सभी संभव मदद कर रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
इस बीच, भारतीय सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है जिसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह यमन में भारतीय नर्स की जान बचाने के लिए राजनयिक प्रयास करे। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगी।


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