एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कहा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता है। पत्रकारों को इन घटनाओं की रिपोर्टिंग करते हुए सभी पक्षों की बात सुनकर अपने विवेक से सही तथ्यों को जनता के सामने पेश करना चाहिए। यह उनकी पेशेगत जिम्मेवारी के साथ-साथ देश की उस जनता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन भी है जो अपनी बात रखने के लिए मीडिया पर निर्भर है।
मंगलवार को एक प्रेस वक्तव्य जारी कर गिल्ड ने कहा कि कई बार समाचारों को ‘सबसे पहले’ प्रकाशित करने की कोशिश में मीडिया यह ध्यान नहीं देता है कि कोई घटना किस कारण से घटी है और तत्काल प्राप्त सूचनाओं के आधार पर उसके लिए किसी वर्ग को दोषी ठहरा देता है। इसके गंभीर परिणाम होते हैं। पत्रकारों को इससे बचना चाहिए। गिल्ड ने मीडिया संस्थानों और पत्रकारों से समाज के विभाजन का टूल न बनने की सलाह दी है।