प्रवर्तन निदेशालय ने केरल के कोझीकोड हवाई अड्डे से एक पीएफआई सदस्य को उस वक्त गिरफ्तार किया जब वह देश से भागने की कोशिश कर रहा था। हवाई अड्डे पर आव्रजन अधिकारियों ने मलप्पुरम में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की पेरुम्पडप्पू इकाई के एक मंडल अध्यक्ष अब्दुल रज्जाक बीपी को उसके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की ओर से 9 मार्च को जारी लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) पर कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया। एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि अगले दिन एजेंसी ने उसे लखनऊ में एक विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष पेश किया, जिसने उसे ईडी की सात दिनों की हिरासत में भेज दिया।
रज्जाक के परिसरों में भी मारा था छापा
एजेंसी ने पिछले साल दिसंबर में रज्जाक और अन्य लोगों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली थी और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे। ईडी ने रज्जाक पर पीएफआई की राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए विदेशों से और साथ ही देश के भीतर धन जुटाने का आरोप लगाया है। पीएफआई ने गिरफ्तारी को अवैध और गलत मकसद से की गई कार्रवाई बताया है।
पीएफआई ने ईडी पर लगाया आरोप
पीएफआई केरल के राज्य अध्यक्ष सी पी मोहम्मद बशीर ने एक बयान में कहा कि पूछताछ के लिए पांच दिनों तक ईडी के सामने पेश होने और जांच में सहयोग करने के बाद भी अधिकारियों ने एलओसी जारी किया और उसके खिलाफ जांच पूरी होने के बाद एलओसी को मंजूरी नहीं दी। उसे गिरफ्तार करने के लिए उसे बलि का बकरा बनाया गया। ईडी का कार्य अत्यधिक निंदनीय है और ईडी के तौर-तरीकों पर प्रकाश डालता है।
अबू धाबी में एक बार और रेस्तरां की भी जांच
दिसंबर की छापेमारी के बाद, ईडी ने एक बयान जारी कर कहा था कि जब्त किए गए दस्तावेज मुन्नार विला विस्टा परियोजना सहित केरल में विभिन्न परियोजनाओं के जरिए पीएफआई की मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों के बारे में संकेत देते हैं, जिसे पीएफआई नेताओं द्वारा भारत व विदेश में अपराध से आय को कम करने के लिए बनाया जा रहा है। अबू धाबी में एक बार और रेस्तरां सहित पीएफआई नेताओं द्वारा विदेशी संपत्तियों का अधिग्रहण निदेशालय (ईडी) के संज्ञान में आया है, जिसकी जांच की जा रही है।
इस इस्लामिक संगठन का गठन 2006 में केरल में हुआ था और इसका मुख्यालय दिल्ली में है। ईडी देश में नागरिकता विरोधी (संशोधन) अधिनियम के विरोध में फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगों और कुछ अन्य मामलों में पीएफआई के वित्तीय लिंक की जांच कर रहा है।