बीकानेर जमीन घोटाला मामले में रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से एक स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी के मालिक महेश नागर का सहयोगी है। दरअसल, स्काईलाईट हॉस्पिटैलिटी का संबंध रॉबर्ट वाड्रा से है। वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जीजा हैं।
ईडी ने जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया है उनके नाम जयप्रकाश भार्गव और अशोक कुमार है। अशोक कुमार स्काइलाईट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के मालिक महेश नागर के करीबी हैं। आरोप है कि नागर ने ही राबर्ट वाड्रा की ओर से जमीन का सौदा किया था। इन दोनों व्यक्तियों को ईडी ने मनी लांड्रिंग रोधी अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है।
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एजेंसी ने बीकानेर के 275 बीघा जमीन आवंटन में धांधली को लेकर इसी साल अप्रैल में अशोक कुमार और नागर के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इससे पहले ईडी ने साल 2015 में इस मामले में पीएमएलए के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया था। जहां वाड्रा इस मामले में किसी भी गलत काम से इंकार करते रहे हैं वहीं कांग्रेस इसे सरासर राजनीतिक बदला करार देती रही है।
275 बीघे जमीन घोटाले की जांच कर रही है ईडी :
ईडी की पूरी जांच का संबंध स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राईवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा खरीदे गए 275 बीघा जमीन से है। ईडी ने अपने बयान में कहा कि स्काइलाईट हॉस्पिटैलिटी ने 69.55 हेक्टेयर की जमीन को 72 लाख रुपये में खरीदा और फिर तीन साल बाद उसे 5.15 करोड़ रुपये में बेच दिया। इस तरह से कंपनी को 4.43 करोड़ रुपये का भारी मुनाफा हुआ।
कुछ साल पहले राजस्थान के कोलायत क्षेत्र में यह खरीद-फरोख्त हुई थी। वहीं ईडी ने मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत इस मामले में सरकारी अधिकारियों और अन्य की 1.18 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है।
एफआईआर में वाड या उनसे जुड़ी कंपनी का नाम नहीं :
इस मामले में ईडी ने वाड्रा से संबंधित कंपनी को भी नोटिस जारी किया और उनसे कुछ कागजात प्राप्त किए। हालांकि ईडी के एफआईआर में वाड्रा या उनसे जुड़ी हुई किसी कंपनी का नाम नहीं है। जबकि एफआईआर में राजस्थान सरकार के कुछ अधिकारियों भू-माफियाओं के नाम शामिल हैं।
सरकार ने रद्द कर दिया था जमीन ट्रांसफर :
इस सौदे में अनियमितता पाए जाने के बाद राजस्थान सरकार ने 2015 में 374.44 हेक्टेयर जमीन के ट्रांसफर को रद्द कर दिया था। तहसीलदार ने अपनी शिकायत में कहा था कि यह सरकारी जमीन थी जो आर्मी महाजन फील्ड फायरिंग रेंज के लिए 34 गांवो से विस्थापित किए गए लोगों को दी जाने वाली थी।