ब्रिटिश हुकूमत में वर्ष 1884 में मुजफ्फरपुर स्थित प्रिंटिंग प्रेस को गोरखपुर में शिफ्ट किया गया और यहां से हिंदी में छपाई शुरू की गई। 31 मई 1955 तक इस प्रेस का प्रशासनिक नियंत्रण सीसीएस (मुख्य वाणिज्य अधीक्षक) के हाथ में था। एक जून 1955 को इसका नियंत्रण भंडार नियंत्रक को सौंप दिया गया। तब यह इलाका बंगाल एंड नार्थ वेस्टर्न रेलवे (बीएनडब्लूआर) एवं तिरहूत रेलवे के अधीन था। 14 अप्रैल 1952 में पूर्वोत्तर रेलवे का गठन किया गया। यहां उस वक्त करीब चार हजार कर्मचारी कार्यरत थे।
पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ संजय यादव का कहना है कि 31 जुलाई से रेलवे प्रिंटिंग प्रेस में छपाई संबंधित सभी गतिविधियां बंद हो गई हैं। इसकी सूचना रेलवे बोर्ड को भी दी जा चुकी है।
पीआरकेएस महामंत्री विनोद कुमार राय का कहना है कि प्रेस बंद न किए जाने के लिए एनएफआईआर के जरिये रेलवे बोर्ड से अनुरोध किया गया था। यह निर्णय कर्मचारी विरोधी है।