राजधानी दिल्ली में चल रहे रायसीना डायलॉग में यूक्रेन के मुद्दे पर भारत के रुख पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, हमारा रुख पहले से ही स्पष्ट है। हम तत्काल युद्ध विराम चाहते हैं। हम चाहते हैं कि बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर वापस लौटा जाए। उन्होंने कहा, जब एशिया में नियम-आधारित व्यवस्था को चुनौती दी जा रही थी, तो हमें यूरोपीय देशों से सलाह मिली- अधिक व्यापार करो। कम से कम हम यह सलाह किसी को नहीं दे रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा, एक साल से भी कम समय पहले अफगानिस्तान को पूरी दुनिया ने अकेला छोड़ दिया था। यह सब अपने हितों और अपनी रुचियों का सही संतुलन खोजने के बारे में है। विभिन्न देशों के लिए प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। मैं जानना चाहता हूं कि अफगानिस्तान के मसले पर दुनिया ने कौन सा न्यायोचित कदम उठाया?
हम कदम उठाने को तैयार
विदेश मंत्री ने कहा, कोई संघर्ष नहीं चाहता है। जब युद्ध खत्म होगा तब कोई विजेता नहीं होगा। युद्ध से बाहर भी एक दुनिया है। उन्होंने कहा, भारत युद्ध के प्रभावों को कम करने के लिए कदम उठाने को तैयार है, जिसके कारण खाद्य संकट जैसी चुनौतियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भी युद्ध के कारण हैं, लेकिन हम खाद्य भंडारण के संदर्भ में इसे देखते हैं। भारत कृषि उत्पादों खासकर गेहू का निर्यात कर इस अंतर को कम कर सकता है। विदेश मंत्री ने कहा, हम भोजन की कमी को कम करने में योगदान दे सकते हैं।
वैश्विक मामलों में बड़ी भूमिका के लिए भारत तैयार
विदेशमंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, भारत वैश्विक मामलों में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार है। उन्होंने कहा, यदि विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियम अनुमति दे तो खाद्य मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए गेहूं की अधिक आपूर्ति कर दुनिया की मदद कर सकते हैं। यूक्रेन युद्ध समेत चीन के उदय पर भारत के पक्ष के बारे में पूछे गए सवाल पर विदेशमंत्री ने कहा, भारत बड़े वैश्विक मामलों और बहुपक्षीय क्षेत्रों में अधिक ठोस तरीके से अपनी भूमिका निभाने को तैयार है।