दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के बैराज से पानी छोड़े जाने के कारण पश्चिम बंगाल के कई दक्षिणी जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि अगले दो से तीन दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है, क्योंकि पिछले दो दिनों में जो पानी छोड़ा गया, वह अब पहले प्रभावित जिलों में पहुंच रहा है।
हालांकि, डीवीसी की मैथन बांध की चीफ इंजीनियर अंजनी के. दुबे ने बताया कि डीवीसी ने रात को 2.1 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा। लेकिन आज सुबह से पंचेत और मैथन बांधों से पानी छोड़ने की मात्रा धीरे-धीरे कम हो रही है, क्योंकि ऊपरी इलाकों में बारिश थम गई है। बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे पानी छोड़ने की मात्रा 1.7 लाख क्यूसेक थी और फिर 10:45 बजे तक यह 1.4 लाख क्यूसेक रह गई।
1.5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ने पर 'रेड अलर्ट' घोषित किया जाता है, जबकि 1 लाख से 1.5 लाख क्यूसेक के बीच पानी छोड़ने पर ऑरेंज अलर्ट जारी होता है। बीरभूम, बंकुरा, हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर और पश्चिम बर्धमान जिलों के कई हिस्से जलमग्न हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार अलपन बंद्योपाध्याय ने बताया कि स्थिति गंभीर बनी हुई है और अगले दो दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि इस बाढ़ जैसी स्थिति में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आपदा राहत टीमें प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। राज्य सरकार ने स्थिति की करीब से निगरानी की है और पहले ही 25 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया है। स्थानीय विधायक और अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों मं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और लोगों की मांगों को सुन रहे हैं।
पश्चिम मेदिनीपुर के देबरा विधानसभा क्षेत्र में जब एक बांध नदी में बहा तो लोगों ने विधायक हुमायूं कबीर के सामने विरोध प्रदर्शन किया। विधायक ने कहा, लोगों ने सही तरीक से विरोध किया है, क्योंकि नदी पर बांध की मरम्मत चल रही थी, जिसे पूरा नहीं किया जा सका था। हम लोगों को राहत केंद्रों में ले जा रहे हैं, स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और सभी जरूरी मदद प्रदान करेंगे।