ईडी ने तमिलनाडु के डीजीपी को पत्र लिखकर राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। डीवीएसी के अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने ईडी कार्यालय में गैर-कानूनी रूप से तलाशी ली और संवेदनशील दस्तावेज चुराए थे।.
संघीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 1 दिसंबर को उसके मदुरै उप-जोनल कार्यालय में किए गए डीवीएसी छापे के दौरान, राज्य एजेंसी के अधिकारियों ने 'ईडी के पूरे कार्यालय में तोड़फोड़ की।'
डीवीएसी की तलाशी तब ली गई जब विभाग ने ईडी के मदुरै में तैनात प्रवर्तन अधिकारी अंकित तिवारी को एक डॉक्टर से कथित तौर पर 20 लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया।
तलाशी न केवल अवैध है, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी
प्रवर्तन निदेशालय ने भी तिवारी के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए अपने अधिकारी के खिलाफ इस डीवीएसी एफआईआर का संज्ञान लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। ईडी के मदुरै कार्यालय के स्टेशन प्रमुख, एक सहायक निदेशक रैंक के अधिकारी, ने शनिवार को डीजीपी को पत्र लिखकर कहा कि डीवीएसी द्वारा की गई कथित तलाशी न केवल अवैध है, बल्कि दुर्भावनापूर्ण भी है।
उन्होंने आगे कहा कि हम आपसे अनुरोध करते हैं कि अवैध तलाशी लेने वाले डीवीएसी अधिकारियों और उन सभी लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें, जिन्होंने अनधिकृत तरीके से ईडी के कार्यालय परिसर में प्रवेश किया और ईडी के केस रिकॉर्ड चुराए, प्रतियां लीं और अन्य अपराध किए।
डीजीपी से क्या थी शिकायत
एजेंसी ने पत्र में डीजीपी को यह भी बताया कि डीवीएसी अधिकारी गिरफ्तार ईडी अधिकारी के कमरे में दाखिल हुए और 'उन केस फाइलों को खोला जिनका उस कथित मामले से कोई संबंध नहीं है जिसके लिए तलाशी का आदेश दिया गया था।'
इसमें कहा गया है कि कुल 35 लोग, जिनमें सिविल ड्रेस में कुछ लोग शामिल थे, जो मीडियाकर्मियों और एक भीड़ के साथ डीवीएसी के पुलिस कर्मी होने का दावा कर रहे थे, "जबरन" ईडी कार्यालय में घुस गए।
ईडी ने आरोप लगाया, "जब हमने उनके पहचान पत्र और यात्रा के उद्देश्य के बारे में पूछा, तो वे कोई भी पहचान पत्र देने में आनाकानी करने लगे और अंदर घुस गए।"