सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाए। इसके साथ ही दवे ने भारतीय न्यायपालिका को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की भी आलोचना की। दुष्यंत दवे ने यह तमाम बातें केरल में आयोजित 17वें केएम बशीर मेमोरियल लेक्चर में कहीं।
दवे ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनकी पत्नी को भी मतदाता सूची में शामिल किए जाने को लेकर नोटिस मिला है। दवे ने कहा, ''चुनाव आयोग और भारत के सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद, बालिग मताधिकार खत्म होता जा रहा है, क्योंकि एसआईआर के नाम पर सभी को, यहां तक कि मुझे और मेरी पत्नी को भी नोटिस मिला है कि क्या हमें वास्तव में मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए या नहीं।''
न्यायपालिका में विविधता की कमी का मुद्दा
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दवे ने न्यायपालिका में सामाजिक और लैंगिक विविधता की कमी को भी न्याय देने की प्रक्रिया से जोड़ा। उन्होंने कहा कि देश के ज्यादातर जज ऊंची जातियों से आते हैं और बड़ी संख्या में जज कानूनी बिरादरी से ही आते हैं। पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ का जिक्र करते हुए दवे ने कहा, ''जस्टिस चंद्रचूड़ खुद को महान और उदारवादी जज बताते थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 17 जजों की नियुक्ति की। उनमें एक भी महिला नहीं थी।''
एसआईआर पर चिंता जताते हुए क्या बोले दुष्यंत दवे?
वरिष्ठ अधिवक्ता दवे ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी हालिया रिपोर्टों के संदर्भ में एसआईआर को लेकर अपनी चिंता जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईआर को जारी रखने की अनुमति दिए जाने से बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव हो चुके हैं और एसआईआर की वजह से लाखों लोग मताधिकार से वंचित हुए। उन्होंने दिल्ली और महाराष्ट्र में भी बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने का दावा किया।
न्यायपालिका पर भी उठाए सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, दवे ने भारतीय न्यायपालिका को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 48 वर्षों तक वकील के तौर पर काम करने के दौरान उन्होंने न्यायपालिका में कई भ्रष्ट जज देखे हैं। दवे ने कहा, ''मैं 48 वर्षों से न्यायपालिका में वकील रहा हूं और मैं आपको बता सकता हूं कि न्यायपालिका में कुछ बेहतरीन जज हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इतने भ्रष्ट जज रहे हैं कि अब मैंने उनकी गिनती खो दी है। उन्होंने न्याय को बहुत नुकसान पहुंचाया है।''
उन्होंने आरोप लगाया कि अमीर और प्रभावशाली लोगों ने न्यायिक व्यवस्था पर अपना प्रभाव बढ़ा लिया है और उनके मामले तेजी से सुने जाते हैं। दवे ने कहा, ''अमीर और ताकतवर लोगों ने न्यायिक व्यवस्था को हमसे छीन लिया है। उनके मामलों की सुनवाई तेजी से होती है। उनके मामले हमेशा सफल होते हैं। आप अखबार खोलिए और पाएंगे कि सबसे बड़े औद्योगिक घरानों को हर दूसरे या तीसरे दिन अपने पक्ष में कोई न कोई फैसला मिल जाता है। यह बहुत हैरान करने वाला है कि वे हर मामले में कैसे सफल होते हैं।''