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Kisan Andolan: हरियाणा में आंदोलन के दौरान दर्ज केस वापस लेने में आनाकानी, पुलिस भेज रही नोटिस

Mon, 06 Jun 2022 07:05 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी जिला उपायुक्तों को लिखे अपने पत्र में कहा था कि राज्य में 09 सितंबर 2020 के बाद किसानों पर दर्ज केस वापस लिए जाएं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन में किसानों पर दर्ज केस वापसी को लेकर बयान दिया था...
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किसान आंदोलन - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार
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किसान आंदोलन के दौरान हरियाणा में जिन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत जो केस दर्ज किए गए थे, उन्हें वापस लेने में सरकार आनाकानी कर रही है। ताजा मामला जींद जिले के नरवाना कस्बे का है। यहां के गांव दनोदा कलां निवासी अशोक और जोगीराम को सदर थाना पुलिस ने नोटिस भेजा है। इसमें लिखा है कि उक्त दोनों लोगों के खिलाफ अपराध में शामिल होने की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई है। 10 जून को सुबह 11 बजे दोनों का सदर थाने में पेश होना बाध्यकारी है। एसकेएम नेता इंद्रजीत सिंह ने कहा, किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने के लिए हरियाणा सरकार की नीयत ठीक नहीं है। रेलवे पुलिस भी केस वापस नहीं ले रही है।

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दनोदा कलां निवासी अशोक और जोगीराम के खिलाफ 21 अगस्त 2021 को धारा 8(बी), एनएच एक्ट 1956, 147, 149, 283 व 341 के तहत मामला दर्ज किया गया था। हरियाणा में एसकेएम नेता इंद्रजीत सिंह ने कहा, 06 दिसंबर 2021 को केंद्र सरकार ने एक ड्राफ्ट जारी किया था, जिसमें आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मामले वापस लेने की बात कही थी। चूंकि इसमें सशर्त शब्द लिखा था। एसकेएम 'संयुक्त किसान मोर्चा' ने इस पर एतराज जताया था। इसके बाद केंद्र ने 09 दिसंबर को फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया था। इसमें लिखा था कि किसानों पर दर्ज सभी मामले तुरंत प्रभाव से वापस होंगे।

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इस तरह के मामलों में दिल्ली के लाल किला पर हुई घटना से जुड़े केस, राष्ट्रीय राजमार्ग रोकना, काले झंडा दिखाना और रेल बाधित करना, आदि शामिल हैं। जिन मामलों में चार्जशीट नहीं हुई, वे भी रद्द कर दिए गए थे। जो केस अदालत में पहुंच गए थे, उन्हें भी एक प्रक्रिया के तहत बंद करने की बात कही थी। हरियाणा सरकार ने इसे लेकर सभी जिला अटॉर्नी को पत्र भेजा था। हालांकि अभी तक रेलवे के केस वापस नहीं लिए गए हैं। यहीं पर सरकार की कथनी और करनी में अंतर दिखाई पड़ता है। प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा था कि हमने केंद्र से सभी मामले वापस लेने की स्वीकृति प्राप्त कर ली है। इसके बाद भी प्राथमिकता के आधार पर केस वापसी नहीं हो रहे। एसकेएम का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही रेल मंत्री से मुलाकात करेगा। रेलवे एक्ट में जितने भी केस दर्ज हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
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राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी जिला उपायुक्तों को लिखे अपने पत्र में कहा था कि राज्य में 09 सितंबर 2020 के बाद किसानों पर दर्ज केस वापस लिए जाएं। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सदन में किसानों पर दर्ज केस वापसी को लेकर बयान दिया था। उन्होंने सदन को बताया था कि प्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान कुल 276 केस दर्ज हुए थे। इनमें हत्या व दुष्कर्म के भी चार केस शामिल हैं। सीएम ने कहा था कि हत्या व दुष्कर्म से जुड़े मामले वापस नहीं होंगे। उस वक्त सीएम ने बताया था कि 178 मामलों में चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी गई है, जबकि 57 अनट्रेस हैं। 29 केसों को रद्द करने की प्रक्रिया जारी है।

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