केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शनिवार को कहा कि जब दुनिया ने कोविड-19 महामारी से निपटने की भारत की क्षमता पर संदेह किया तो देश के पेशेवर इस मौके पर पहुंचे और हितधारक 'खुद के काम से पहले सेवा' की परंपरा को दिखाने के लिए एक साथ आए।
उन्होंने कहा, "हमने अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के साथ लॉकडाउन प्रोटोकॉल और स्वास्थ्य सलाह का पालन किया। इसने हमें अगले वर्ष पॉजिटिव डेवलपमेंट के रास्ते पर वापस चलने वाला पहला देश बनने की अनुमति दी।"
स्वास्थ्य मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आयुर्विज्ञान संस्थान और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चौथे स्थापना दिवस पर आयोजित दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, मंडाविया ने कहा कि युवा, भारत को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी स्नातक छात्रों और पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और उनके माता-पिताओं, संकाय सदस्यों को उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण में निवेश करने के लिए प्रेरित करने और मार्गदर्शन करने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हमने अगले पच्चीस वर्षों के लिए भारत के हेल्थ विजन का निर्माण किया है। यह विजन न केवल हमारे चिकित्सा पेशेवरों के लिए अपार अवसर लाएगा बल्कि हमारे सभी राष्ट्र निर्माताों को हमारे नागरिकों की बेहतर तरीके से सेवा करने की अनुमति देगा।
मंडाविया ने कहा, दुनिया ने जब महामारी से निपटने में भारत की क्षमता पर सवाल उठायातो हमारे पेशेवर इस अवसर पर पहुंचे। हितधारक स्वयं से पहले भारत की सेवा की परंपरा का प्रदर्शन करने के लिए एकसाथ आए, यह सबसे ज्यादा मायने रखता है।
मंडाविया ने आगे कहा कि देश एक सुलभ, सस्ती और रोगी के अनुकूल स्वास्थ्य प्रणाली की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य प्राथमिक, माध्यमिक, और तृतीय स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करके देश के दूर-दराज के इलाकों में भी 'सभी के लिए स्वास्थ्य' सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि एक समृद्ध भारत तभी सुनिश्चित किया जा सकता है जब हमारे पास स्वस्थ भारत होगा। बयान में कहा गया है कि उन्होंने सभी स्नातक छात्रों और संकाय सदस्यों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में तब्दील हो।
उन्होंने मूल्य प्रणाली के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि छात्रों को शिष्टाचार, नैतिकता और सहानुभूति के साथ इंसान बनना चाहिए जो इस महान पेशे में आचार संहिता में आवश्यक और गहराई से शामिल हैं।