इस साल कोलकाता में दुर्गा पूजा के पंडाल को पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा भी बनाया जाएगा। शहर के दुर्गा पूजा आयोजकों के मंच दुर्गोत्सव से जुड़े दत्ता ने बताया कि शहर की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की तरफ से मानवता की अमूर्ति सांस्कृतिक विरासत के तौर पर मान्यता दिए जाने के जश्न में सभी पूजा समितियों के सदस्य एक सितंबर को रैली निकालेंगे।
इस साल कोलकाता में दुर्गा पूजा के पंडाल प्रकृति और सांप्रदायिक समरसता की थीम पर बनाए जाएंगे। आयोजक हर साल थीम के आधार पर पंडालों में रोशनी, सजावट व मूर्तियों की साज-सज्जा करते हैं। उत्तरी कोलकाता में काशी बोस लेन पूजा समिति के महासचिव सोमन दत्ता ने बताया कि वे माटी (पृथ्वी) पर आधारित सजावट करेंगे।
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पंडाल को पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा भी बनाया जाएगा। शहर के दुर्गा पूजा आयोजकों के मंच दुर्गोत्सव से जुड़े दत्ता ने बताया कि शहर की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की तरफ से मानवता की अमूर्ति सांस्कृतिक विरासत के तौर पर मान्यता दिए जाने के जश्न में सभी पूजा समितियों के सदस्य एक सितंबर को रैली निकालेंगे। भारत सरकार ने यूनेस्को से गरबा को भी विरासत का दर्जा देने का आग्रह किया है।
उत्तर कोलकाता में दिखेगी वृंदावन की झलक
उत्तर कोलकाता में कॉलेज स्क्वायर पूजा समिति के प्रवक्ता बिकाश मजूमदार ने बताया कि इस बार वे वृंदावन के राधा-कृष्ण मंदिर जैसा दिखने वाला पंडाल बनाएंगे। इसमें करीब एक लाख लोग एक साथ आ सकेंगे। पंडाल के अंदर आजादी और उनकी पूजा समिति की 75वीं वर्षगांठ को मनाते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।
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1946 होगा पुनर्जीवित
समाज सेबी संघ के सचिव अरिजित मैत्रा ने बताया कि इस बार दुर्गा पूजा में पंडाल में 1946 का माहौल पुनर्जीवित किया जाएगा, जब कोलकाता में सांप्रदायिक दंगों के बाद सांप्रदायिक भाईचारे के साथ दुर्गा पूजा आयोजित की गई थी। पंडाल की थीम में सांप्रदायिक भाईचारे पर जोर दिया जाएगा।