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हवाई अड्डों की सुरक्षा के लिए अमेरिका, इजरायल जैसी तकनीक का इस्तेमाल करेगा भारत

Fri, 12 Oct 2018 09:57 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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हवाई अड्डों पर आजकल अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी) या जिसे आमतौर पर ड्रोन कहा जाता है, अक्सर दिखाई दे जाते हैं। यह ड्रोन पिछले कुछ सालों से सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बने हैं। इस परेशानी से निपटने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) जल्द ही इंटेग्रेटिड काउंटर ड्रोन मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करेगा। 

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यह सिस्टम बिना विमान संचालन में खलल डाले इन ड्रोन्स को काफी किलोमीटर के दायरे तक प्रभावहीन कर सकते हैं। वर्तमान में इस सिस्टम का इस्तेमाल फ्रांस, इजरायल, ब्रिटेन और अमेरिका में किया जाता है। इन्हें एंटी-यूएवी डिफेंस सिस्टम भी कहा जाता है। यह काउंटर ड्रोन ना केवल माइक्रो, मिनी और लार्ज ड्रोन्स को ट्रैक या उनका पता लगा सकते हैं बल्कि उन्हें अशक्त करने के साथ ही नीचे भी गिरा सकते हैं। 

इस आटोमेटिड सिस्टम में लंबी रेंज का रडार सर्विलेंस, डेलाइट कैमरा, इंफ्रारेड, टारगेट ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर, रेडियो फ्रिक्वेंसी जैमर सिस्टम और दूसरे परिष्कृत नियंत्रण लगे हैं जो काफी किलोमीटर दूरी वाले ड्रोन को नीचे गिरा सकता है, उसकी कमांड को निष्प्रभाव कर सकता है और उसे जाम तक कर सकता है। यह सारे काम बिना हवाई यातायात में खलल डाले करने में सक्षम है।
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सीआईएसएफ के महानिदेशक राजेश रंजन ने कहा, 'यह तकनीक इस बात का पता लगा सकती है कि एयरस्पेस में जो चीज नजर आ रही है वह कोई चिड़ियां है या ड्रोन। यह एक निश्चित दूरी से भी ड्रोन बनाने वाली कंपनी का पता लगा सकती है और बिना मानवीय हस्तक्षेप के उसे नीचे गिरा सकती है।' सीआईएसएफ देश की अग्रणी विमानन सुरक्षा बल है। उसके अतंर्गत 60 हवाई अड्डे आते हैं। 

सीआईएसएफ को इस तकनीक के बारे में विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय उड्डयन सुरक्षा सेमिनार में पता चला। जहां 18 देशों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। उसने इस तकनीक में दिलचस्पी दिखाई है। टेस्ट में पास होने के बाद खरीदा जाएगा। रंजन ने कहा कि इस सिस्टम से सुरक्षा जांच में सीआईएसएफ जवानों को लगने वाले समय की बचत होगी।

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