चंद दिन पहले तक आम गांव की श्रेणी वाला मुर्मू का गांव बेहद खास हो गया है। ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव की बेटी द्रौपदी देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति जो बनने जा रही हैं। बृहस्पतिवार शाम से ही यहां जश्न शुरू हो गया। मगर, आम से खास बने इस गांव की कहानी तमाम चुनौतियों का सामना करने वाले दूसरे तमाम गांवों की ही तरह है। हालांकि, स्थानीय लोगों को अपने दिन बहुरने की उम्मीद दिखने लगी है।
ग्रामीण बताते हैं, इस गांव की सड़कें तब बनीं थीं, जब द्रौपदी पहली बार विधायक चुनी गई थीं। तब ही गांव में पानी की पाइप बिछी। कान्हू नदी पर पुल बना। पशुओं का अस्पताल खुला। चंद दिनों पहले तक गांव के डुंगरीसाई मजरे के तीस से ज्यादा घरों के लोग लालटेन की रोशनी में रातें काटा करते थे। मुर्मू के राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी बनने पर यहां बिजली के बल्ब जले हैं। अब गांव में सरकारी अमले का आना-जाना बढ़ गया है और अधूरे विकास कार्यों में भी तेजी आई है।
गांव में काफी लोगों के पास पक्का मकान नहीं है। हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेज 20 किमी दूर हैं। इससे सबसे ज्यादा मुश्किल लड़कियों को होती है। उन्हें इतनी दूर साइकिल या अन्य साधनों से जाना पड़ता है। यहां बैंक भी नहीं है। अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। लोग चाहते हैं कि उनके गांव में ही बैंक हो। हाईस्कूल को अपग्रेड कर इंटरमीडिएट कर दिया जाए। अस्तपाल में कम से कम 14 बेड की सुविधा हो जाए, जिससे लोगों को स्थानीय स्तर पर ठीक से इलाज मिल सके।
उपरबेड़ा में जश्न का माहौल
गांव में जश्न का माहौल है। मुर्मू का शपथ समारोह देखने के लिए बड़ी टीवी स्क्रीन लगाई गई हैं। ग्रामीणों का कहना है, दीदी के राष्ट्रपति बनने के बाद वे दीदी का नया घर राष्ट्रपति भवन देखना चाहते हैं। द्रौपदी के भाई तारणीसेन टूडू व परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लगा है।
द्रौपदी को पुराना घर लगे प्यारा
द्रौपदी मुर्मू का जन्म खपरैल वाले घर में हुआ था। अब उसके बाहरी हिस्से में पक्का मकान बन गया है। द्रौपदी का कमरा आज भी वैसा ही है। लोग बताते हैं कि द्रौपदी को अपना पुराना घर अच्छा लगता है। वह अक्सर गांव आती रहती हैं।
पूर्ण शाकाहारी, खाने में ‘पखल’ पसंद
द्रौपदी के भाई तारणीसेन टूडू कहते हैं, दीदी को पानी से बनने वाला विशेष खाना ‘पखल’ बहुत पसंद हैं। वह पूरी तरह शाकाहारी हैं और लहसुन-प्याज तक नहीं खातीं।
आदिवासी बहुल 1.35 लाख गांवों में भाजपा मनाएगी जश्न
भाजपा देशभर के आदिवासी बहुल 1.35 लाख गांवों में मुर्मू की जीत का जश्न मनाएगी। सांसदों, विधायकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें अपने क्षेत्रों में यह संदेश देने के लिए कहा गया है कि भाजपा ने पहली बार आदिवासी समाज को देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचाया है।
लोकसभा की सौ सीटों व कई राज्यों पर असर
देश में सौ लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां आदिवासी वर्ग निर्णायक भूमिका में हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, गुजरात, प. बंगाल, ओडिशा, कर्नाटक जैसे राज्यों में यह वर्ग प्रभावी है। भाजपा पहला लाभ गुजरात में लेना चाहती हैं, जहां इसी साल विधानसभा चुनाव हैं।