आरिफ पर चर्चा के बाद द्रौपदी के नाम पर मुहर
राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारी के सवाल पर भाजपा में जिन प्रमुख नामों पर चर्चा हुई, उनमें केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का नाम सबसे आगे था। हालांकि गुजरात, पश्चिम बंगाल, ओडिशा सहित कुछ अन्य राज्यों में बेहतर राजनीतिक संभावनाएं तलाशने के लिए द्रौपदी मुर्मू के नाम पर अंतिम मुहर लगी। इस दौर में राज्यपाल थावर चंद गहलोत के नाम पर भी गंभीरता से विमर्श हुआ था, हालांकि खुद गहलोत ने वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ही दोबारा मौका दिए जाने की दलील दी थी।
सूत्रों का कहना है कि फिलहाल खान को उपराष्ट्रपति बनाने का विकल्प खुला है। राष्ट्रपति चुनाव संपन्न होने के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव पर व्यापक चर्चा होगी। गौरतलब है कि केंद्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रपति चुनाव के संदर्भ में आरिफ मोहम्मद खान के साथ भी कई दौर की बातचीत की थी। सूत्रों का कहना है कि इस बारे में गहलोत की प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात में उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी अनुसूचित जाति को फिर से राष्ट्रपति बनाना चाहती है तो इसके लिए वर्तमान को ही एक और मौका दिया जाना चाहिए।
द्रौपदी को मौका क्यों?
दरअसल भाजपा का आदिवासियों में प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। देश में इस बिरादरी की आबादी सवा आठ फीसदी है। कुछ महीने बाद गुजरात में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां यह बिरादरी संख्या की दृष्टि से बेहतर प्रभावशाली है। फिर इस बिरादरी का प्रभाव पश्चिम बंगाल, झारखंड, आंध्रप्रदेश और ओडिशा में भी बहुत ज्यादा है। इनमें से ओडिशा और पश्चिम बंगाल में पार्टी अरसे से सत्ता हासिल करना चाहती है। फिर इस बिरादरी का प्रभाव मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक में भी है।
- पार्टी का इस बिरादरी में बेहद प्रभाव है। इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि बीते लोकसभा चुनाव में एसटी आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा को जीत हासिल हुई थी। फिर मूर्म को खांटी भाजपाई होने के साथ महिला और अनुसूचित जाति वर्ग से होने का सीधा लाभ मिला।
दलित के साथ आदिवासी दांव
देश को अब तक सभी वर्गों से राष्ट्रपति मिल चुका है। दलित बिरादरी से केआर नारायणन के बाद रामनाथ कोविंद देश का प्रथम नागरिक बन चुके हैं।
- महिला वर्ग से प्रतिभा पाटिल को मौका मिल चुका है। मुस्लिम बिरादरी से फखरुद्दीन अली अहमद और एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रपति बन चुके हैं।
- अब तक अनुसूचित जनजाति वर्ग से किसी को प्रथम नागरिक बनने का मौका नहीं मिला था। मुर्मू की उम्मीदवारी ने इस कमी को दूर कर दिया है।
विपक्ष को उम्मीदवार नहीं मिला तो पूर्व भाजपाई को चुना : संघ
आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने विपक्ष पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें अपने खेमे से कोई उम्मीदवार नहीं मिला इसलिए जल्दबादी में साझा राष्ट्रपति प्रत्याशी तौर पर पूर्व भाजपाई को चुना। उन्होंने कहा, बेहतर होता यदि सरकार और विपक्ष अगले राष्ट्रपति के नाम पर एकमत होते।