डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने स्वामी अग्निवेश के संस्मरणों को संक्षिप्त में बताते हुए कहा कि स्वामी अग्निवेश जी अपनी पहचान गरीबों, मजदूरों के उद्धार तथा कुरीतियों के खिलाफ अपनी आवाज को बुलन्द करके बनाई।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक और आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रीय को वेद विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया है। ये सम्मान इन दोनों के सामाजिक और राष्ट्रीय संदर्भ में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए दिया गया। सम्मान प्रसिद्ध समाजसेवी स्वामी अग्निवेश की दूसरी पुण्यतिथि पर दिया गया जो समाज के वंचित लोगों की आवाज बेहद प्रमुखता से उठाते रहे थे। उन्होंने अपने सामाजिक जीवन में बंधुआ श्रमिकों की रिहाई के लिए बहुत कार्य किया था।
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स्वामी अग्निवेश की प्रेरणा सभा के अध्यक्ष स्वामी आर्यवेश ने कहा कि स्वामी अग्निवेश ने भरी जवानी में अपनी प्रोफेसर की नौकरी को ठोकर मारकर स्वामी दयानन्द द्वारा स्थापित आर्य समाज के कार्यों के लिए अपने आपको समर्पित कर दिया था और अपने विचारों एवं कार्यों से आर्य समाज की पहचान विश्व स्तर पर बनाई। इस अवसर पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वैदिक विद्वान आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रीय ने स्वामी अग्निवेश के साथ अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि स्वामी अग्निवेश व्यवस्था परिवर्तन में विश्वास करते थे जिससे समाज का उपकार किया जा सके। आज हमें उनके विचारों की बार-बार याद आती है कि वे कितने दूरदर्शी थे।
इस अवसर पर डॉ. वेदप्रताप वैदिक ने स्वामी अग्निवेश के संस्मरणों को संक्षिप्त में बताते हुए कहा कि स्वामी अग्निवेश जी अपनी पहचान गरीबों, मजदूरों के उद्धार तथा कुरीतियों के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद करके बनाई। उन्होंने भारत ही नहीं अपितु कई अन्य देशों में अपने विचारों से लोगों को प्रभावित किया। स्वामी अग्निवेश जी ने सती प्रथा के खिलाफ आन्दोलन करके कानून बनवाए, कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ यात्रा निकालकर पूरे देश में जन-जागृति फैलाने का कार्य किया। विश्व के कई संगठनों में अध्यक्ष एवं सदस्य रहते हुए मानवता के लिए अनेक उपयोगी कार्य किए।