सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने शनिवार को चीफ जस्टिस से ग्रीष्म अवकाश को रद्द करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण कामकाज में हुए नुकसान की भरपाई जरूरी है। 16 मई से 5 जुलाई तक का ग्रीष्म अवकाश प्रस्तावित है।
भारतीयों की वापसी को लेकर याचिका
अमेरिका में फंसे भारतीयों को वापस लाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने अपनी याचिका में कहा कि अमेरिका में कोरोना का प्रकोप बड़े पैमाने पर है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय फंसे हुए हैं। ऐसे में सरकार मानवता और कानूनी कर्तव्यों को निभाते हुए वहां फंसे लोगों लाने की व्यवस्था करे।
कोरोना वायरस की मुफ्त जांच के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश की निजी प्रयोगशालाओं ने हाथ खड़े कर दिए। इनका कहना है कि कोविड-19 की मुफ्त जांच के लिए हमारे पास साधन नहीं हैं। सरकार को रास्ता निकालना चाहिए, जिससे निजी प्रयोगशालाएं बढ़ती मांग के बीच जांच का काम जारी रख सकें।
डॉ. डैंग्स लैब के सीईओ डॉक्टर अर्जुन डैंग ने कहा, ‘हम शीर्ष अदालत के आदेश को स्वीकार करते हैं, जिसका उद्देश्य कोविड-19 जांच की पहुंच बढ़ाने और इसे आम आदमी के लिए आसान बनाना है। निजी लैब के लिए कई चीजों की लागत तय है, जिनमें रीएजेंट्स, उपभोग की वस्तुओं, कुशल कामगारों और उपकरणों का रख-रखाव शामिल है।
कोरोना की जांच में भी संक्रमण नियंत्रण के कई उपाय करने पड़ते हैं। जैसे व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), संक्रामक परिवहन तंत्र और साफ सफाई की जरूरत। सरकार द्वारा तय 4500 रुपये की दर में निजी लैब बमुश्किल लागत निकाल पाती हैं। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश का पालन करते हुए हम अभी जांच मुफ्त कर रहे हैं और इस बारे में सरकार की तरफ से चीजों को और स्पष्ट किए जाने का इंतजार है।