विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वह यमन में चिकित्सा आपूर्ति सेवाएं मुहैया करा रहा है। संगठन का कहना है कि यहां टेस्ट किट, वेंटिलेटर दिए जा रहे हैं और साथ में स्वास्थ्यकर्मियों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है। यमन में सेव द चिल्ड्रेन के निदेशक जेवियर जूबर्ट ने कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण है कि दोनों पक्ष युद्ध विराम का पालन करें। उन्होंने कहा 'संक्रमण का पहला मामला सामने है और हम सभी इसे लेकर डर रहे थे। हम उम्मीद कर रहे थे कि ये देश वायरस से बच जाए, क्योंकि यमन इस वायरस का सामना करने के लिए बेहद कमजोर स्थिति में है।'
वो कहते हैं, 'कोविड 19 महामारी देश की पहले से ही चरमराई स्वास्थ्य सुविधा पर और दबाव डालेगा और इसका नागरिकों पर बुरा और विनाशकारी असर होगा। अगर हम इसके लिए आज काम नहीं करेंगे तो आने वाले समय में जो हमारे सामने होगा, उसे बयां नहीं किया जा सकेगा।'
इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी की तामुना सुबेद्ज कहती हैं, 'यमन में लाखों लोग बेहद कम जगह में और गंदगी के बीच रहने कि लिए मजबूर हैं। वे वायरस का मुकाबला करने के लिए बेहद कमजोर स्थिति में हैं।' सुबेद्ज के मुताबिक, 'हमें पता था कि दुनियाभर में कोरोना वायरस फैल चुका है और यह यहां भी आ सकता है लेकिन बावजूद इसके हम यही कहेंगे कि यमन में कोविड 19 के मामले का सामने आना बुरे सपने की तरह है।'
इससे पहले वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने कहा था कि फंड में कमी के चलते हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले कुछ इलाकों में सहायता आधी करने के लिए वो मजबूर हैं। संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी का कहना था कि कुछ दानकर्ताओं ने अपनी सहायता इसलिए रोक दी थी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि भेजी जाने वाली सहायता को हूती विद्रोही रोक रहे हैं। एजेंसी का कहना है कि अप्रैल के लगभग दो हफ्ते बाद से परिवारों को हर महीने के बजाय अब दो महीने में एक बार ही सहायता मिल सकेगी।