Bengal: कांग्रेस ने चुनाव आयोग से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा तब तक टालने का आग्रह किया है, जब तक एसआईआर के तहत विचाराधीन मतदाताओं के मामलों का निपटारा नहीं हो जाता। पढ़िए पूरी रिपोर्ट-
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मांग की कि जब तक पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 'विचाराधीन मतदाताओं' से जुड़े सभी मामलों का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान न किया जाए।
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पार्टी ने कहा कि राज्य में करीब 60 लाख लोगों के मतदान अधिकार न्यायिक समीक्षा के दायरे में हैं, ऐसे में चुनाव की ओर से घोषणा करना उचित नहीं होगा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और अगर इन आवेदनों को मौका दिए बिना चुनाव कराए गए तो यह 'वोट चोरी' के समान होगा।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को सौंपा ज्ञापन
पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को ज्ञापन भी सौंपा। नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े सभी लंबित मामलों के निपटारे के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया और फॉर्म-6 व फॉर्म-7 से जुड़े आवेदनों की दोबारा जांच की मांग की है।
गुलाम अहमद मीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा?
कांग्रेस महासचिव और पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके नेता राहुल गांधी पिछले कई महीनों से आंकड़ोंके जरिये देश-दुनिया को बता रहे हैं कि किस तरह वोट चारी हो रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से सामने आ रहे मामले भी वोट चोरी के बड़े उदाहरण हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगले कुछ दिनों में राज्य में चुनावों की घोषणा होने वाली है। लेकिन, जब करीब 60 लाख लोगों के मताधिकार न्यायिक समीक्षा की प्रक्रिया में हैं, तो चुनाव की तारीखों की घोषणा कैसे की जा सकती है।
मीर ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से हजारों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा, कांग्रेस की मांग है कि जब तक इन मतदाताओं के भविष्य का फैसला नहीं हो जाता, तब तक चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर समीक्षा के तहत लंबित आवेदनों को मौका नहीं दिया गया तो, चुनाव कराना निरर्थक होगा। अगर चुनाव आयोग ऐसा नहीं करता है, तो यह स्पष्ट तौर पर वोट चोरी होगी।