डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (डीएनपीए) ने डिजिटल प्रतिस्पर्धा कानून के लिए बनी समिति (CDCL) की रिपोर्ट का स्वागत किया है। हाल ही में सामने आई इस रिपोर्ट में भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था में मौजूद प्रतिस्पर्धा विरोधी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रस्तावित डिजिटल प्रतिस्पर्धा कानून असल में मौजूदा प्रतिस्पर्धा कानून की रूपरेखा पर ही आधारित है। इसका उद्देश्य यह है कि बड़ी टेक कंपनियों और विशेषकर प्रणालीगत रूप से अहम डिजिटल उद्यमों यानी SSDE और सहायक डिजिटल उद्यमों यानी ADE के प्रतिस्पर्धा विरोधी तौर-तरीकों से निपटा जाए।
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के शीर्ष 18 प्रकाशकों की डिजिटल इकाइयों का संगठन है। दरअसल, न्यूज पब्लिशर्स और डीएनपीए के सदस्यों को बड़ी टेक कंपनियों के प्रभुत्व और राजस्व बंटवारे में पारदर्शिता की कमी की वजह से राजस्व में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।
'प्रावधानों में स्पष्टता आने की उम्मीद'
डीएनपीए ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग को मजबूत करने के प्रस्ताव का भी स्वागत किया है। डीएनपीए ने कहा है कि मसौदा प्रस्ताव में प्रतिस्पर्धा में निष्पक्षता लाने की बात स्पष्ट तौर पर कही गई है। जब ये नियम लागू हो जाएंगे तो प्रतिस्पर्धा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता आ जाएगी और बारगेनिंग से जुड़े मामलों में प्रावधानों को लेकर स्पष्टता आएगी। समिति ने अपीलों की सुनवाई के लिए पीठ गठित करने की सिफारिश की है ताकि मामलों में देरी न हो। डीएनपीए ने समिति की इस सिफारिश की भी तारीफ की है।
डीएनपीए ने कहा, 'हम किसी भी बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ नहीं हैं। हमारा मानना है कि सभी साथ मिलकर तरक्की करें। हम प्रस्तावित कानून और प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से नियमन तय होने को लेकर आशान्वित हैं ताकि बड़ी टेक कंपनियों के मामलों में ज्यादा निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धा रहे।'