संसद के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी को उनके एक बयान के चलते घेरने का पूरा प्रयास किया। राहुल गांधी एक रैली में 'रेप इन इंडिया' का बयान दिया था। उनके इसी बयान को लेकर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सहित भाजपा के कई सांसदों ने जोरदार हंगामा किया। भाजपा सांसदों ने इस बयान पर राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की।
कनिमोझी ने जब इस पर बोलना शुरू किया, तो उन्होंने एक तीर से कई निशाने लगा डाले। उन्होंने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा, देश में मेक इन इंडिया तो है ही नहीं। बल्कि दुर्भाग्य से देश की महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। उनका यह बयान तमिलनाडु की राजनीति समझने वालों के लिए काफी था। सदन में कनिमोझी का यह अंदाज खासतौर पर, भाजपा और उसके सहयोगी दलों को रास न आया हो, लेकिन कांग्रेस उससे खुश नजर आई।
कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव के नतीजे कांग्रेस के लिए भले ही अच्छे नहीं रहे, लेकिन दक्षिण भारत से पार्टी के लिए राहत भरी खबर आई थी। कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में नौ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसमें से पार्टी ने 8 सीटें जीत लीं। पार्टी को 12 फीसदी वोट मिले। तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी के इन नतीजों को देखकर यह कहा जाने लगा कि पार्टी दोबारा से अपने पैरों पर खड़ी हो रही है।
1967 में राज्य में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस पार्टी अन्नाद्रमुक या द्रमुक की पिछलग्गू बनकर रह गई थी। तभी से लेकर अब तक पार्टी अपने पांव पर नहीं खड़ी हो सकी। लोकसभा चुनाव के नतीजों से यह उम्मीद बंधने लगी है कि पार्टी अब अपना खोया हुआ जनाधान वापस पा सकती है। बशर्ते उसे डीएमके को साथ लेकर चलना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है निश्चित ही कांग्रेस तमिलनाडु में पुनर्जीवित होने की स्थिति में हैं। लोकसभा चुनाव में बेशक यह कहें कि कांग्रेस को वह जीत केवल द्रमुक के साथ होने की वजह से नहीं मिली है। तमिलनाडु के मतदाताओं ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को वोट दिया था।
द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने राहुल को प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश किया। आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में यहां के लोगों ने कांग्रेस को वोट दिया था। इसके बाद लोगों ने 1989 में राजीव गांधी के पक्ष में मतदान किया था। इस बार के लोकसभा चुनाव में फिर से लोगों ने राहुल गांधी को वोट दिया है। यह तय है कि दक्षिण भारत में मोदी को रोकना है तो अभी कांग्रेस और डीएमके को साथ चलना होगा। लोकसभा चुनाव में डीएमके को 38 में से 23 सीटें मिली थीं।
पिछले वर्ष निचली अदालत ने सीबीआई के टूजी मामले में राजा, कनिमोई, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा, राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया, स्वान टेलिकॉम के प्रमोटरों शाहिद उस्मान बलवा और विनोद गोयनका, यूनिटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय चंद्रा और अनिल धीरूबाई अंबानी रिलायंस समूह के तीन शीर्ष प्रबंधकों गौतम दोशी, सुरेंद्र पीपारा और हरि नायर को बरी कर दिया था। तब कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा था, कि अब साबित हो गया है कि तत्कालीन विपक्ष ने बिना किसी सबूत के यूपीए सरकार पर निराधार आरोप लगाए थे।
सिब्बल ने कहा था कि तत्कालीन कैग विनोद राय ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ साजिश की थी। इस फैसले ने साबित कर दिया है कि राय की निष्ठा किस ओर थी। पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, एक हाई प्रोफाइल दो लाख करोड़ के घोटाले में सरकार के वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों के शामिल होने की बातें पूरी तरह से निराधार थीं। हम हमेशा यही कहते रहे और मुझे बेहद खुशी है कि सत्य की जीत हुई है।
लोकसभा सांसद शशि थरूर ने भी फैसले पर खुशी जताई थी। उन्होंने कहा था कि निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाया गया था। देश की न्यायपालिका ने वैसे ही काम किया जैसे उसे करना चाहिए। इससे कांग्रेस और डीएमके के रिश्ते और ज्यादा मजबूत हुए थे।