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Bimstec: 'मिलकर चुनौतियों का सामना करें-समाधान खोजें', बिम्सटेक के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में बोले जयशंकर

Thu, 11 Jul 2024 09:36 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Bimstec: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक और क्षेत्रीय विकास के लिए यह बेदह जरूरी है कि हम आपस में मिलकर चुनौतियों का सामना करें और समाधान खोजें। हमारे सामने क्षमता निर्माण और आर्थिक सहयोग जैसे दीर्घकालिक लक्ष्य हैं, जिन्हें काफी अहमियत मिली है।
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बिम्सटेक के सदस्य देशों के विदेश मंत्री - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को सात पड़ोसी देशों के संगठन बिम्सटेक के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन की मेजबानी करते हुए कहा कि यह संगठन भारत के लिए पड़ोसी पहले, एक्ट ईस्ट और सागर दृष्टिकोण को जोड़ने का जरिया है। बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेक) के साथ रणनीतिक जुड़ाव को स्पष्ट करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत के व्यापक भू-राजनीतिक ढांचे में पड़ोसी पहले, एक्ट ईस्ट नीति और सागर दृष्टिकोण बेहद अहम हैं।

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उन्होंने कहा, हम पिछली बार इसी तरह की बैठक में पिछले साल जुलाई में बैंकॉक में मिले थे। उसके बाद से बिम्सटेक की गतिविधियों को गहरा और व्यापक बनाने के हमारे प्रयासों को बढ़ावा मिला है। इस साल 20 मई से बिम्सटेक चार्टर लागू हो गया है। वैश्विक और क्षेत्रीय विकास के लिए यह बेदह जरूरी है कि हम आपस में मिलकर चुनौतियों का सामना करें और समाधान खोजें। हमारे सामने क्षमता निर्माण और आर्थिक सहयोग जैसे दीर्घकालिक लक्ष्य हैं, जिन्हें काफी अहमियत मिली है। सबसे अहम बात यह है कि एक ऐसा समूह जो अपनी सदस्यता में इतना पूरक और अनुकूल है कि इससे बड़ी आकांक्षाओं को जन्म मिलेगा। इन साझा आकांक्षाओं को बिम्सटेक के महत्वाकांक्षी विजन के रूप में व्यक्त किया जाएगा।

जयशंकर ने बताया कि भारत के लिए बिम्सटेक पड़ोसी पहले, एक्ट ईस्ट और सागर दृष्टिकोण के जुड़ाव का केंद्र है। इनमें से प्रत्येक प्रयास बंगाल की खाड़ी पर विशेष ध्यान केंद्रित करके किया जा रहा है, जहां सहयोगात्मक क्षमता को लंबे समय से कमतर कर आंका गया है। हमारे सामने सहयोगात्मक क्षमतआओं को बेहतर बनाने की चुनौती है। इसके लिए हमें तीव्र बदलाव करने होंगे।
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उन्होंने कहा कि हम सभी को बैंकॉक में पिछले साल हुई बैठक से काफी लाभ हुआ है। उम्मीद है, आज के प्रयासों का भी आगे लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रियों की बैठक बेहद अहम है, क्योंकि यह वर्ष के अंत में होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए मजबूत बुनियाद तैयार करती है। यहां से हमारा संदेश स्पष्ट होना चाहिए कि हम सभी बंगाल की खाड़ी के देशों के बीच सहयोग में नई ऊर्जा, नए संसाधन और नई प्रतिबद्धता को शामिल करने के लिए दृढ़ हैं।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि दो दिवसीय सम्मेलन में कनेक्टिविटी, संस्थागत निर्माण, व्यापार और व्यवसाय में सहयोग, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष में सहयोग, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, क्षमता निर्माण और सामाजिक आदान-प्रदान के नए तंत्रों के बारे में विचार-विमर्श किया जा रहा है।

क्या है बिम्सटेक
बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-ऑपरेशन (बिम्सटेक) बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसमें भारत, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और थाइलैंड शामिल हैं। इसका मकसद बंगाल की खाड़ी से लगे देशों में तीव्र आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने और साझा हितों के मुद्दों पर समन्वय स्थापित करने के लिए सकारात्मक वातावरण बनाना है। बैंकॉक डिक्लेरेशन, 1997 के तहत इसे स्थापित किया गया। 

पाकिस्तान ने भी इसमें शामिल होना चाहा था, लेकिन उसे अलग रखा गया है। शुरुआत में इसमें चार देश थे और इसका नाम बिसटेक यानी बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग संगठन था। 22 दिसंबर, 1997 में म्यांमार इसमें शामिल हो गया, तो इसका नाम बिम्सटेक हो गया था। 2004 में भूटान और नेपाल को इसमें शामिल किया गया।

जयशंकर ने भूटान और बांग्लादेश के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की
विदेश मंत्री जयशंकर ने आज बांग्लादेश और भूटान के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के तरीकों पर फोकस किया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, आज शाम नई दिल्ली में बांग्लादेश के विदेश मंत्री हसन महमूद से मिलकर अच्छा लगा। बार-बार उच्च स्तरीय आदान-प्रदान भारत-बांग्लादेश मैत्री की ताकत को दिखाता है। हमने इसे आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।  

भूटान के विदेश मंत्री डीएन ढुंगयेल के साथ अपनी बातचीत पर जयशंकर ने कहा कि भारत और भूटान के बीच मित्रता और सद्भावना के अनूठे संबंधों को आगे ले जाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, बिम्सटेक सम्मेलन से इतर ढुंगयेल से मिलकर खुशी हुई। दोस्ती और सद्भावना के हमारे अनूठे संबंधों को आगे ले जाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया। 
 
जयशंकर ने अपने श्रीलंका के विदेश राज्य मंत्री थरका बालासूर्या से भी मुलाकात की। इसको लेकर उन्होंने कहा, श्रीलंका के विदेश राज्य मंत्री का स्वागत करके खुशी हुई। हमने हमारी द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा की। 

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