गुरुवार की दोपहर को मौसम विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी होती है कि अगले कुछ दिनों तक दिल्ली एनसीआर में जबरदस्त बारिश होगी। बारिश को लेकर सिर्फ एडवाइजरी ही जारी नहीं होती है, बल्कि एक बड़ी चेतावनी भी जारी होती है। मौसम विभाग की इस वार्निंग के बाद आनन-फानन में दिल्ली एनसीआर में स्कूलों के बंद होने का फरमान जारी कर दिया जाता है। बड़े-बड़े दफ्तरों और कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम के निर्देश जारी कर दिए जाते हैं और फिर शुरू होता है बारिश का वह मंजर जो बीते 3 दिनों से दिल्ली एनसीआर के लोग देख रहे हैं और अब उत्तर भारत के कई राज्यों में उसी तरीके से बारिश का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि अचानक मानसून की सक्रियता इतनी बढ़ जाती है कि पूरे मानसून की बारिश का एक बड़ा हिस्सा महज दो से तीन के भीतर ही बरस गया। क्या वास्तव में यह क्लाइमेट चेंज की बड़ी वजह है या कुछ और कारण है। देश के मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा से अमर उजाला डॉट कॉम के आशीष तिवारी ने ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब लेने की कोशिश की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
सवाल: बीते कुछ दिनों से देश की राजधानी से लेकर अलग-अलग हिस्सों में जमकर बारिश हो रही है। अमूमन इस तरीके की बारिश कम दिखती है। क्या यह असामान्य सी घटना है।
जवाब: नहीं। इसमें कुछ भी असामान्य सा नहीं है। यह बात अलग है कि इस तरीके की बारिश कम होती है लेकिन ऐसा नहीं है कि मानसून में यह घटना असामान्य हो। बीते कुछ सालों में हर साल एक ऐसा चक्र आता ही आता है जिसमें खूब बारिश होती है।
सवाल: ऐसा क्या हो गया कि बीते कुछ सालों में मानसून में एक ऐसा चक्र आता है जिसमें कुछ दिनों में ही जबरदस्त बारिश हो जाती है और बाकी मानसून का एक बड़ा हिस्सा सूखे में ही गुजर जाता है।
जवाब: दरअसल बीते कुछ दशकों में हल्की हल्की होने वाली बारिश में कमी आई है, जबकि बहुत तेज होने वाली बारिश में इजाफा देखा गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों में और विभाग के शोध में इस बात की पुष्टि भी हुई है।
सवाल: क्या वजह है कि हल्की बारिश कम हो गई और तेज बारिश के चक्र अचानक बढ़ गए।
जवाब: निश्चित तौर पर ऐसा क्लाइमेट चेंज और उस के दुष्प्रभावों के चलते ही हुआ। मानसून की पूरी बारिश अब महज चंद दिनों में होने वाली हेवी रेन फॉल में ही पूरी हो जाती है। इसका हर स्तर पर असर भी पड़ता है।
सवाल: आपके महकमे की ओर से इस पर कोई स्टडी भी की गई है कि इसका क्या असर पड़ रहा है और इससे बचाव के लिए आगे के क्या उपाय किए जा रहे हैं।
जवाब: मौसम विभाग में देश के हर जिले को लेकर बारिश और उसके होने वाले प्रभाव दुष्प्रभाव को लेकर पूरी स्टडी की है। सेंट्रल इंडिया और साउथ इंडिया में ऐसी बारिश का सिलसिला बढ़ा है। चाहे आप केरल में अचानक आई बारिश और उसके बाद के अंजाम ओ को देखें या पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में हुई उत्तराखंड में आई तेज बारिश का हश्र देखें।
सवाल: बदले हुए बरसात के ट्रेंड से क्या मानसून की पूरी अनुमानित बरसात हो जाती है। टुकड़ों में होने वाली तेज बरसात का कहीं अच्छा असर भी होता होगा तो कहीं दुष्प्रभाव भी पड़ते होंगे।
जवाब: जी बिल्कुल। अब आप 23 सितंबर तक हुई बारिश का ही आंकड़ा देख लीजिए। इस वक्त तक पूरे देश में जितनी बारिश हुई है वह अपनी अनुमानित बरसात का 107 फीसदी तक है। यानिकी बरसात ठीक हो रही है। हां, यह बात तो जरूर है कि कहीं पर बरसात कम कहीं पर ज्यादा बरसात का असर तो पड़ता ही है।
सवाल: बरसात पर कुछ बदलते हुए ट्रेंड भी विभाग के आंकड़ों में दर्ज है क्या। मसलन जिन इलाकों में पहले ज्यादा बरसात होती थी वहां कम होने लगी और जहां पर कम होती थी वहां पर ज्यादा होने लगी।
जवाब: हां, ऐसा ट्रेंड बीते कुछ दशकों में देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश बिहार पश्चिम बंगाल मेघालय और नगालैंड में मौसम विभाग ने 1989 से 2018 तक आंकड़े इकट्ठे किए तो पाया कि मानसून के एक हिस्से से होने वाली बारिश यहां पर काफी कम हो गई है। अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के सालाना औसतन बारिश में कमी दर्ज की गई है। जबकि कभी सूखे जैसे हालात वाले राजस्थान और गुजरात के कुछ पश्चिमी इलाकों में बारिश का ट्रेंड बढ़ा हुआ दिखा है।
सवाल: तो बीते कुछ दिनों से दिल्ली एनसीआर के आसमान और उत्तर भारत के कुछ राज्यों में हो रही बारिश को आप क्लाइमेट चेंज के असर की वजह से देख रहे हैं।
जवाब: नहीं, बिल्कुल नहीं। बीते कुछ दिनों में होने वाली बारिश को क्लाइमेट चेंज का असर नहीं कहेंगे। क्योंकि जहां जहां पर कम दबाव का क्षेत्र बनता है वहां पर बारिश तेज हो जाती है। खासतौर से उत्तर भारत के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में ऐसा ज्यादा देखने को मिलता है। हां अगर आप बीते कई दशकों के पूरे ट्रेंड को देखेंगे तो निश्चित तौर पर क्लाइमेट चेंज का असर दिखेगा, लेकिन छुटपुट बरसात को आप उससे नहीं जोड़ सकते हैं। क्योंकि पिछले साल ऐसी ही बारिश अक्टूबर और नवंबर में भी हुई थी। इस बार सितंबर में हुई है। कम दबाव के क्षेत्रों में बारिश होती ही है, यह तो बारिश होने की एक भौगोलिक वैज्ञानिक प्रक्रिया ही है। इसका क्लाइमेट चेंज से कोई असर नहीं है।
सवाल: अगले कुछ दिनों के मौसम को ले करके विभाग का क्या अनुमान है। क्या ऐसे ही बादल बरसेंगे।
जवाब: दिल्ली और एनसीआर में तो अब बारिश का मौसम अगले सात दिनों तक नहीं दिख रहा है। उत्तर भारत के कुछ राज्यों में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है इसलिए वहां पर बारिश हो रही है। क्योंकि राजस्थान के पश्चिमी इलाकों से अब मानसून के जाने का दौर शुरू हुआ है। इसलिए 15 अक्टूबर तक अनुमानतः दक्षिण पश्चिम का मानसून विदा हो जाएगा। हालांकि उसके बाद नॉर्थ ईस्ट का मानसून सक्रिय होगा जो दिसंबर तक कोस्टल रीजन से लेकर दक्षिण के हिस्से में बरसात करता रहेगा।