वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बजट पेश करते हुए अपने भाषण में डिजिटल रुपये की शुरुआत की घोषणा की। इसे लेकर वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को दावा किया कि रिजर्व बैंक द्वारा अगले वित्तीय वर्ष से शुरू होने वाला प्रस्तावित डिजिटल रुपया काले धन पर लगाम लगाने में कारगर साबित होगा। हालांकि, जब आरबीआई अधिकारी के इस बयान पर अमर उजाला ने पोल कराया, तो इसमें पाठकों की राय काफी बंटी हुई नजर आई।
अमर उजाला के इस पोल में कुल 1482 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें 780 यानी करीब 52.63 फीसदी लोगों ने माना कि डिजिटल रुपया काले धन पर लगाम लगाने में सफल होगा। हालांकि, 702 लोग यानी करीब 47.37 फीसदी लोगों का मानना है कि रिजर्व बैंक की इस डिजिटल मुद्रा से काले धन को रोकने में कोई सफलता नहीं मिलेगी।
काले धन पर रोक के दावे के पीछे क्या था अधिकारी का तर्क?
वित्त मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि यदि आप किसी दुकानदार से कुछ खरीदते हैं और डिजिटल पैसे के माध्यम से भुगतान करते हैं और उस डिजिटल पैसे का इस्तेमाल दुकानदार द्वारा अपने विक्रेता को भुगतान करने के लिए किया जाता है, तो आरबीआई के पास डिजिटल रुपये के साथ किए गए लेन-देन का सारा डेटा होगा।
अधिकारी ने कहा था कि काले धन की आय आमतौर पर भूमिगत आर्थिक गतिविधियों से नकद में प्राप्त होती है और इस तरह की आय पर कर नहीं लगाया जाता है, लेकिन अगर आरबीआई के पास हर डिजिटल रुपये के लेन-देन का निशान है तो किसी व्यक्ति के लिए करों से बचना मुश्किल होगा। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में डिजिटल रुपया पेश करने की घोषणा करते हुए कहा कि सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) की शुरुआत से डिजिटल अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। डिजिटल मुद्रा एक अधिक कुशल और सस्ती मुद्रा प्रबंधन प्रणाली को भी बढ़ावा देगी।