फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीजीएचएस घोटाला: 839 करोड़ के भुगतान पर सवाल, टेंडर फाइलें भी गायब; एक्सरे मशीन की कीमत में कैसे हुआ खेल?

Fri, 30 Oct 2026 01:32 AM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।

सार

डीजीएचएस की चिकित्सा खरीद से जुड़े मामले में एसीबी ने 12 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर पांच कंपनियों को 839 करोड़ रुपये के भुगतान में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, टेंडर फाइलें नष्ट की गईं और एक पोर्टेबल एक्सरे मशीन को खरीद कीमत से काफी अधिक दर पर सरकार को बेचा गया। पूर्व महानिदेशक वत्सला अग्रवाल, विनोद कुमार रंगा और नीरज चोपड़ा पर खरीद प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े आरोप हैं। विशेष अदालत ने 17 अक्तूबर को चार्जशीट का संज्ञान लिया है और मामला दस्तावेजों की जांच के चरण में है।
 
विज्ञापन
डीजीसीएच घोटाला - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) की चिकित्सा खरीद से जुड़े मामले में एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। एसीबी के मुताबिक, खरीद प्रक्रिया से जुड़ी टेंडर फाइलें जानबूझकर नष्ट की गईं और पांच लाभार्थी कंपनियों को कुल 839 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि बिल सरकारी ई-मार्केटप्लेस के जरिये तैयार नहीं किए गए थे। मामले में डीजीएचएस की पूर्व महानिदेशक वत्सला अग्रवाल, केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के पूर्व प्रमुख विनोद कुमार रंगा और नीरज चोपड़ा के खिलाफ 12 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है। विशेष न्यायाधीश विद्या प्रकाश ने 17 अक्तूबर को चार्जशीट का संज्ञान लिया। मामला अभी दस्तावेजों की जांच के चरण में है।
विज्ञापन


14 लाख की एक्सरे मशीन 38 लाख रुपये में कैसे बेची गई?
एसीबी ने आरोप लगाया कि एफ-मेड डिवाइसेज नाम की फर्म ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर पोर्टेबल एक्सरे मशीनों की खरीद में गड़बड़ी की। जांच एजेंसी के अनुसार, फर्म ने 448 पोर्टेबल एक्सरे मशीनें खरीदी थीं। प्रत्येक मशीन की खरीद कीमत 14,92,000 रुपये थी, जबकि सरकार को यही मशीन 37,80,000 रुपये प्रति मशीन की दर से बेची गई। एसीबी का दावा है कि फर्म ने निर्धारित पात्रता शर्तें पूरी नहीं की थीं, इसके बावजूद उसे खरीद का ठेका मिला। एजेंसी के मुताबिक, इस प्रक्रिया से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और संबंधित फर्म को अनुचित लाभ हुआ।

टेंडर फाइलें नष्ट करने में किसकी भूमिका होने का आरोप है?
एसीबी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय खरीद एजेंसी के पूर्व प्रमुख विनोद कुमार रंगा सरकारी धन के संरक्षक होने के बावजूद अन्य आरोपियों के साथ मिलीभगत में शामिल थे। एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने सरकारी संपत्ति के कथित गबन और सबूत नष्ट करने में भूमिका निभाई। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया कि रंगा के स्थानांतरण के बाद भी गायब फाइलों को खोजने का प्रयास नहीं किया गया। 
विज्ञापन


वत्सला अग्रवाल पर भी हटाई गई फाइलों का पता लगाने की कोशिश नहीं करने का आरोप है। चार्जशीट के अनुसार, कार्यालय के आदेशों के मुताबिक टेंडर फाइलें रंगा की सुरक्षित हिरासत में होनी चाहिए थीं। अधिकारियों के बयानों को भी जांच एजेंसी ने अपने आरोपों के समर्थन में पेश किया है।

वत्सला अग्रवाल पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
चार्जशीट के मुताबिक, कथित अनियमितताओं के समय वत्सला अग्रवाल डीजीएचएस की महानिदेशक थीं। उनकी जिम्मेदारियों में चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़ी फाइलों की निगरानी और मंजूरी देना शामिल था। एसीबी का आरोप है कि उन्होंने पोर्टेबल एक्सरे मशीनों समेत अन्य उपकरणों की संदिग्ध खरीद को मंजूरी दी। एजेंसी के मुताबिक, केंद्रीय खरीद एजेंसी को आवंटित धनराशि पर भी उनकी निगरानी और मंजूरी की भूमिका थी। आरोप है कि उन्होंने सरकारी ई-मार्केटप्लेस की प्रक्रिया को दरकिनार कर आपूर्ति के आदेश जारी किए। एफ-मेड डिवाइसेज से जुड़े एक बिल के मामले में उन्होंने उसी दिन भुगतान को मंजूरी दी, जिसके बाद फर्म को 33,37,23,600 रुपये का भुगतान किया गया।

नीरज चोपड़ा की क्या भूमिका बताई गई है?
नीरज चोपड़ा संबंधित अवधि में केंद्रीय खरीद एजेंसी में उप लेखा नियंत्रक (डीसीए) थे। एसीबी ने खरीद रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका की जांच की। चार्जशीट में पोर्टेबल एक्सरे मशीनों के अलावा सी-आर्म, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, लिनन, ओआरएस और दवाओं की खरीद में भी कथित अनियमितताओं का उल्लेख है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ खरीद में फर्मों की पात्रता और उपकरणों की विशिष्टताओं से जुड़ी शर्तों को लेकर गड़बड़ी हुई। नीरज चोपड़ा पर खरीद और वित्तीय प्रक्रिया से जुड़ी समितियों में भाग लेने, बोली से संबंधित फाइलों को मंजूरी देने और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी धन के कथित गबन व सबूत नष्ट करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें