पेगासस जासूसी और कृषि कानूनों समेत अन्य मुद्दों पर विपक्षी दलों के भारी हंगामे के चलते मानसून सत्र में लोकसभा में 22 फीसदी तो राज्यसभा में 28 फीसदी ही कामकाज हो सका।
मोदी सरकार के सात साल के कार्यकाल में सबसे ज्यादा हंगामा इसी सत्र में हुआ। इसके बावजूद राज्यसभा से औसतन प्रतिदिन एक से अधिक विधेयक पारित हुए। यह जानकारी केंद्र सरकार ने खुद बृहस्पतिवार को दी।
हालांकि स्थगन और हंगामे के चलते 11 अगस्त तक राज्यसभा 76 घंटे 26 मिनट बर्बाद हुए। 2014 में राज्यसभा के 231वें सत्र के दौरान 4 घंटे 30 मिनट बर्बाद हुए थे। इसके बाद स्थगन और हंगामे के चलते औसत प्रतिदिन सबसे अधिक वक्त इस सत्र में बर्बाद हुआ।
राज्यसभा की कार्यवाही मात्र 17 दिन चली लेकिन 2014 के बाद से सबसे अधिक अवरोध के बावजूद सदन में औसतन हर दिन 1.1 बिल पारित किए गए। पिछले साल मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में हर दिन औसतन 2.5 बिल पास किए गए थे, जो कि साल 2014 के बाद से सबसे ज्यादा था।
इस सत्र के दौरान दोनों सदनों द्वारा 22 बिल पास किए गए। मानसून सत्र की शुरुआत 19 जुलाई को हुई थी और सत्र 13 अगस्त तक चलना था लेकिन तय अवधि से दो दिन पहले ही दोनों सदन अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित कर दिए गए।
बिना चर्चा कराए बिलों को पारित कराने के आरोप पर सरकार ने कहा कि यूपीए सरकार ने 2006 से 2014 के बीच आंध्र प्रदेश पुनर्गठन बिल समेत 18 बिल पास कराए थे। यूपीए ने 72 मिनट में 17 विधेयक पारित कराए थे जो करीब हर चार मिनट में एक बिल होता है।