पर्यावरण कार्यकर्ता विमलेंदु झा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) के खिलाफ उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने की वजह से अवमानना याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता झा का कहना है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद एनबीसीसी ने सोमवार को नेताजी नगर में पेड़ों की कटाई की।
इस मामले पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने मंगलवार को कहा कि उन्हें एक पर्यावरण कार्यकर्ता से शिकायत मिली कि
दिल्ली उच्च न्यायालय की रोक के बावजूद आज सुबह नेताजी नगर में पेड़ काटे जा रहे हैं। इस शिकायत पर कदम उठाते हुए मंत्री ने वन विभाग को पेड़ों की कटाई के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए।
दक्षिण दिल्ली में सात कॉलोनियों का पुनर्विकास प्रस्तावित है और
राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) एवं केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) 25,667 सरकारी फ्लैट विकसित करेंगे जिसमें 70,000 कारें खड़ी करने के लिए भूमिगत पार्किंग की व्यवस्था होगी। कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए करीब 14,000 पेड़ों की कटाई करने की जरूरत बताई जा रही है। इस फैसले के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए जिसके बाद एनबीसीसी और सीपीडब्ल्यूडी उच्च न्यायालय में इस बात पर सहमत हुए कि चार जुलाई तक पेड़ों की कटाई नहीं होगी।
सरकारी स्वामित्व वाली रियल एस्टेट विकास कंपनी एनबीसीसी सरोजिनी नगर, नेताजी नगर, नौरोजी नगर का पुनर्विकास कर रही है जबकि सीपीडब्ल्यूडी कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी और मोहम्मदपुर में शेष चार कॉलोनियों का पुनर्विकास करने वाला है। हुसैन ने कहा कि उन्हें पर्यावरण कार्यकर्ता विमलेंदु झा से शिकायत मिली थी, जिन्होंने दावा किया था कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी नेताजी नगर में पेड़ काटे जा रहे हैं।
मंत्री ने वन विभाग को निर्देश दिया कि वह दोषी एजेंसी या व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने सहित सभी जरूरी कार्रवाई करे। एनबीसीसी के सीएमडी एके मित्तल ने बताया कि एनबीसीसी द्वारा दिल्ली में तीन कॉलोनियों का पुनर्निमाण करने वाले सभी ठेकेदारों को पेड़ नहीं काटने का निर्देश दिया गया है। सीएमडी ने बताया, ‘किसी भी उल्लंघन की स्थिति में वे वहां होने वाले सभी परिणामी नुकसान के लिए ज़िम्मेदार होंगे।’