इसे नोटबंदी का असर कहे या इसकी वजह से दिल्ली में रोजी-रोटी नहीं मिलने का दर्द। सच्चाई यह है कि दिल्ली से प्रतिदिन पिछले साल की तुलना में पांच हजार से अधिक लोग पूर्वांचल की तरफ रवाना हो रहे है। अनारक्षित ट्रेन कोच में रवाना होने वाले इनमें ज्यादातर लोग मजदूर वर्ग के दिखाई पड़ते है। जो रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली आते है।
यह स्थिति तब है जब ज्यादातर लोग दीपावली व छठ के दौरान बिहार व उत्तर प्रदेश गए थे। राजधानी से मजदूरों का एक बड़ा वर्ग बिहार, बंगाल व उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हो रहा है। इसकी गवाही आनंद विहार रेलवे स्टेशन से अनारक्षित कोच में सफर करने वाले लोगों के आंकड़े दे रहे हैं। बता दें कि इन स्टेशन से 36 ट्रेन पूर्वांचल के लिए चलती है। आंकड़े बताते है कि पिछले साल 14 नवंबर से 20 नवंबर के बीच 83,500 लोगों ने अनारक्षित टिकट लिए तो इस साल इस अवधि में सवा लाख (1,14,166) लोगों ने टिकट खरीद कर यात्रा की है।
पिछले साल की तुलना में 30,666 यात्री ज्यादा रवाना हुए। राजधानी के अन्य स्टेशन जिसमें नई दिल्ली व पुरानी दिल्ली स्टेशनों शामिल है, यहां से इस अवधि में दस लाख लोग अनारक्षित टिकट से अन्य प्रदेशों के लिए रवाना हो चुके है। इसके अलावा अनारक्षित टिकट ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन, स्मार्ट कार्ड से व यूटीएस से भी अनारक्षित टिकट बुक किए गए हैं।
ताजा मिसाल यह भी है कि बुधवार को करीब डेढ़ बजे जैसे ही बिहार संपर्क क्रांति ट्रेन स्टेशन पर पहुंची लोगों के उतरने के पहले जाने वाले सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। अनारक्षित कोच में ना तो लोग चढ़ पा रहे थे और ना ही उतर पा रहे थे।
इनमें भी ज्यादातर मजदूर वर्ग के लोग ही शामिल दिखें। लिहाजा यह कयास लगाया जा रहा है कि जब से नोटबंदी का सिलसिला शुरू हुआ है, मजदूर वर्ग को काम मिलना लगभग बंद हो गया है। ऐसे में लोग अपने-अपने प्रदेश जाना ही उचित समझ रहे है। बता दें कि बड़ी संख्या में रोजी-रोटी की तलाश में बिहार, यूपी, उड़िसा, पश्चिम बंगा व पूर्वोत्तर से लोग दिल्ली आते है।