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जनधन खातों पर क्या रुख अपनाएं, सरकार असमंजस में 

Thu, 24 Nov 2016 04:31 AM IST
हिमांशु मिश्र/ नई दिल्ली
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- फोटो : Getty
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नोट बंदी के सख्त फैसले के बाद जनधन खातों में जमा भारी भड़कम रकम ने सरकार को उलझन में डाल दिया है। इन खातों में मंगलवार तक 21000 करोड़ रुपये जमा हो चुके थे। सरकार के पास आयकर कानून के तहत कार्रवाई का विकल्प है। सरकार को पता है कि यह रकम कालाधन रखने वालों की है, मगर चूंकि खाता गरीबों का है, ऐसे में सरकार इन खाताधारकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की शुरुआत से पहले मंथन में जुटी है। 
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हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने विभिन्न बैंकों से जनधन खाते में जमा रकम का विस्तृत ब्यौरा तलब कर लिया है। इसके अलावा सरकार ने जनधन खाताधारकों को नोट बंदी के फैसले के बाद अपने खातों में दूसरों की रकम जमा न करने के प्रति बार-बार आगाह भी किया है। 

विश्वस्त सरकारी सूत्रों के मुताबिक नोट बंदी के फैसले के बाद जनधन योजनाओं में एकाएक रकम जमा करने की बाढ़ सी आ गई। इन खातों में अधिकतम 50000 रुपये ही जमा करने की छूट के बावजूद कई खातों में शुरुआती दौर में इससे भी ज्यादा रकम जमा की गई। पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में इसका दुरुपयोग सबसे अधिक हुआ है। 
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जिस हिसाब से अचानक इन खातों में पैसों की बरसात हुई है, उससे यह तो साफ है कि कालाधन रखने वालों ने गरीबों को धन सफेद करने के लिए अपना हथियार बनाया है। सरकार के असमंजस में होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि कार्रवाई हुई तो कालाधन रखने वाले नहीं बल्कि जिन्हें उन्होंने कालाधन को सफेद बनाने का माध्यम बनाया है, वह फंसेंगे। यही कारण है कि कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरकार में मंथन का दौर चल रहा है।

जिन खाताधारकों ने अपने खातों में बड़ी रकम जमा कराई है, उन्हें दोहरा नुकसान झेलना पड़ सकता है। इनके खिलाफ न सिर्फ आयकर कानून की गाज गिरेगी, बल्कि रकम बड़ी होने के कारण खाताधारकों का नाम गरीबी रेखा से नीचे की सूची (बीपीएल) से भी हट जाएगा।  
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