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एक्सप्लेनर: दिवाली से पहले कितनी खराब दिल्ली-एनसीआर की हवा, वजह क्या; कब तक झेलने पड़ सकते हैं ऐसे हालात?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 07 Nov 2026 07:29 PM IST

सार

दिवाली से पहले दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच चुकी है। पराली के धुएं और धीमी हवाओं के बीच दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रैप -3 लागू किया गया है। जानें त्योहार से पहले ही प्रदूषण इतना क्यों बढ़ा है, साथ ही सरकार इससे निपटने के लिए क्या कर रही है और दिवाली के बाद स्थिति कैसी रहने का अनुमान है?
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दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब। - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली-एनसीआर में नवंबर की शुरुआत में ही लोगों की सांसों पर संकट खड़ा हो गया है। आलम यह है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में इस वक्त भारत की राजधानी दिल्ली सबसे ऊपर है। यह स्थिति दिल्ली में दिवाली से पहले ही आ गई है, जिसके चलते राजधानी और इसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रेडेड एक्शन रिस्पॉन्स प्लान (ग्रैप) का तीसरा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर के पूरे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही और निर्माण कार्यों पर अलग-अलग तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं। 

हालांकि, इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले वायु गुणवत्ता कैसी है? दुनिया के अलग-अलग शहरों के मुकाबले भारत में एक्यूआई की स्थिति क्या है? अक्तूबर के अंतिम दिनों में हवा साफ रहने के बाद नवंबर के पहले हफ्ते में ही पूरे क्षेत्र की हवा खराब कैसे हो गई? अगर यह स्थितियां अभी हैं तो दिवाली के बाद हालात कैसे रहने का अनुमान है? सरकार इस स्थिति को संभालने के लिए क्या कर रही है? आइये जानते हैं...

 

पहले जानें- दिल्ली-एनसीआर में आज कैसी है वायु गुणवत्ता?

7 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में समग्र वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और वायु गुणवत्ता निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे क्षेत्र में हवा की स्थिति गंभीर होने का अनुमान है। 

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दिल्ली में वायु गुणवत्ता खराब। - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली-एनसीआर में नवंबर की शुरुआत में ही लोगों की सांसों पर संकट खड़ा हो गया है। आलम यह है कि दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में इस वक्त भारत की राजधानी दिल्ली सबसे ऊपर है। यह स्थिति दिल्ली में दिवाली से पहले ही आ गई है, जिसके चलते राजधानी और इसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रेडेड एक्शन रिस्पॉन्स प्लान (ग्रैप) का तीसरा चरण लागू कर दिया गया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर के पूरे क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही और निर्माण कार्यों पर अलग-अलग तरह की पाबंदियां लगा दी गई हैं। 

हालांकि, इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले वायु गुणवत्ता कैसी है? दुनिया के अलग-अलग शहरों के मुकाबले भारत में एक्यूआई की स्थिति क्या है? अक्तूबर के अंतिम दिनों में हवा साफ रहने के बाद नवंबर के पहले हफ्ते में ही पूरे क्षेत्र की हवा खराब कैसे हो गई? अगर यह स्थितियां अभी हैं तो दिवाली के बाद हालात कैसे रहने का अनुमान है? सरकार इस स्थिति को संभालने के लिए क्या कर रही है? आइये जानते हैं...
 

पहले जानें- दिल्ली-एनसीआर में आज कैसी है वायु गुणवत्ता?

7 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर में समग्र वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और वायु गुणवत्ता निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, पूरे क्षेत्र में हवा की स्थिति गंभीर होने का अनुमान है। 

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दिल्ली में आज एक्यूआई की स्थिति। - फोटो : अमर उजाला
यानी बीते दो दिन में दिल्ली की हवा बेहद खराब की श्रेणी में रही और सुधार नहीं देखा गया। इतना ही नहीं दिल्ली के 59 निगरानी स्टेशनों में से 18 स्टेशनों पर एक्यूआई 'गंभीर' श्रेणी (401–500) में दर्ज किया गया। 
 

दुनिया के अलग-अलग शहरों के मुकाबले भारत में एक्यूआई की स्थिति क्या है?

  • स्विस वायु गुणवत्ता निगरानी समूह आईक्यूएयर (IQAir) की लाइव रैंकिंग के मुताबिक, शनिवार की सुबह दिल्ली दुनिया के प्रमुख शहरों में पहले स्थान पर रहा। यानी यह सबसे प्रदूषित शहरों में टॉप पर था।
  • अमेरिकी वायु गुणवत्ता सूचकांक के पैमाने पर सुबह 10:35 बजे दिल्ली का एक्यूआई 581 दर्ज किया गया। वहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान का लाहौर 285 एक्यूआई पर था, जिसका मतलब है कि दिल्ली का प्रदूषण स्तर लाहौर की तुलना में लगभग दोगुना था।
  • इसके अलावा दिल्ली के पड़ोसी जिलों में गुरुग्राम (एक्यूआई 595) और ग्रेटर नोएडा (एक्यूआई 430) सबसे ज्यादा प्रदूषित रहे। यहां सुबह हवा की खराब गुणवत्ता में दोपहर आते-आते थोड़ा सुधार हुआ। 
  • हालांकि, आईक्यूएयर की यह रैंकिंग अमेरिकी एक्यूआई पद्धति पर आधारित है, जो भारत के आधिकारिक पैमाने से सीधे नहीं जुड़ी है। भारतीय केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अपने पैमाने पर उसी समय दिल्ली का एक्यूआई 363 यानी 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज किया गया था।

दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में एक्यूआई की स्थिति। - फोटो : अमर उजाला

अक्तूबर में रही हवा साफ, नवंबर में क्यों खराब?


1. चक्रवाती तूफान अर्नब की वजह से साफ रही हवा
अक्तूबर के अंत में आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तट से टकराए चक्रवात 'अर्नब' की वजह से जो मौसमी स्थितियां पैदा हुईं, उनका असर उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत तक देखा गया था। दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाएं चली थीं और बारिश हुई थी। इस मौसमी बदलाव ने दिल्ली-एनसीआर में जमा प्रदूषकों को उड़ाकर हवा को कुछ समय के लिए साफ कर दिया था। लेकिन नवंबर की शुरुआत में जैसे ही इस चक्रवात का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हुआ, राहत का यह दौर भी खत्म हो गया।

2. चक्रवात का असर खत्म होते ही हवा खराब
  • चक्रवाती तूफान अर्नब के शांत होते ही हवाओं का रुख फिर से उत्तर-पश्चिम की ओर हो गया। यह दिशा पंजाब, हरियाणा और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले धुएं को सीधे दिल्ली-एनसीआर की ओर ले आई।
  • अक्तूबर में हुई बारिश के कारण किसान खेतों में धान की कटाई नहीं कर पाए थे। मौसम साफ होते ही किसानों ने कटाई का काम तेज कर दिया, जिससे पराली जलाने की घटनाओं में अचानक भारी उछाल आया। 

  • पंजाब में 31 अक्तूबर को एक ही दिन में सीजन के सबसे ज्यादा 194 पराली जलाने के मामले दर्ज हुए और नवंबर के पहले हफ्ते में खेतों में आग की संख्या तेजी से बढ़ी। इससे दिल्ली-एनसीआर बुरी तरह प्रभावित हुए।
  • नवंबर की शुरुआत होते ही हवा की औसत गति घटकर 10 किमी/घंटे से नीचे (और कई समय लगभग शून्य) आ गई। इसके साथ ही वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे गिर गया, जिससे हवा में मौजूद प्रदूषकों का छंटना और दूर बिखरना बंद हो गया।
  • मौसम में ठंडक बढ़ने और न्यूनतम तापमान गिरकर 16.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से जैसे-जैसे धुंध की स्थिति बनने लगी, वैसे ही ठंडी और भारी हवा ने पराली के धुएं, वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण धूल और औद्योगिक धुएं को जमीन की निचली सतह के करीब ही कैद कर लिया।
  • इन स्थितियों के मद्देनजर दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हुई और दिवाली से पहले ही एक्यूआई 'बहुत खराब' से गंभीर की श्रेणी तक पहुंच चुका है।

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दिल्ली में प्रदूषण के स्रोत। - फोटो : अमर उजाला

अगर यह स्थितियां अभी हैं तो दिवाली के बाद हालात कैसे रहने का अनुमान है?

विशेषज्ञों और वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणालियों के डेटा के मुताबिक, दिवाली के दिन और उसके बाद दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति और अधिक बिगड़ने तथा 'गंभीर' श्रेणी में पहुंचने का अनुमान है।

1. 'गंभीर' श्रेणी में जाने की चेतावनी
दिल्ली की एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (ईडब्ल्यूएस) के मुताबिक, हवा की गुणवत्ता 7 से 9 नवंबर तक गंभीर श्रेणी में रहने का अनुमान है। इसके बाद के छह दिनों तक भी प्रदूषण स्तर 'गंभीर' से 'बेहद खराब' श्रेणी के बीच ही बने रहने की संभावना है।

2. दिवाली के अगले दिन सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति
स्काईमेट के मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, 8 नवंबर की रात से चलने वाली हल्की पूर्वी हवाएं दिवाली के दिन प्रदूषकों को थोड़ा बहुत हटाने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, दिवाली के अगले दिन हवा की गति फिर से बेहद कमजोर हो जाएगी, जिससे प्रदूषण बढ़ने की स्थिति है। 9 नवंबर (दिवाली के अगले दिन) स्थिति और खराब हो सकती है, क्योंकि पूर्वी हवाएं फिर से कमजोर पड़ने की संभावना है, जिससे प्रदूषक एक जगह जमा होने लगेंगे और एक्यूआई में बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है।

3. हॉटस्पॉट्स पर एक्यूआई 450 के पार जाने की आशंका
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के विशेषज्ञों का अनुमान है कि त्योहार के दौरान पटाखों के उत्सर्जन, वाहनों के धुएं और पराली के बढ़ते मामलों के एक साथ मिलने से स्थिति बेहद खराब हो सकती है। एक्यूआई बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में जा सकता है। वर्तमान में जो इलाके खराब श्रेणी में हैं वे बहुत खराब में खिसक सकते हैं, जबकि जो पहले से बहुत खराब श्रेणी में हैं वे गंभीर स्थिति में पहुंच सकते हैं। ।

दिल्ली में प्रदूषण का अनुमान। - फोटो : अमर उजाला
4. प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां
आने वाले दिनों में वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे और औसत हवा की गति 10 किमी/घंटा से कम रहने का अनुमान है, जो प्रदूषकों को बिखरने नहीं देती। तापमान में गिरावट और शांत हवाएं इन सभी जहरीले तत्वों को जमीन के करीब ही कैद कर लेंगी।

5. पटाखों पर छूट और प्रतिबंध की समयसीमा
सुप्रीम कोर्ट की ओर से 7 और 8 नवंबर को निर्धारित समय के लिए प्रमाणित ग्रीन पटाखों की अनुमति दी गई है, जबकि 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध फिर से प्रभावी हो जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक हवा की गति में कोई बड़ा प्राकृतिक सुधार नहीं होता, तब तक दिवाली के बाद के हफ्ते में भी प्रदूषण से किसी खास राहत की उम्मीद नहीं है।


प्रदूषण से निपटने की क्या हैं तैयारियां?

दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग और दिल्ली सरकार की तरफ से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तीसरे चरण के तहत कई आपातकालीन कदम और कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं।

वाहनों पर कड़े प्रतिबंध
  • दिल्ली और एनसीआर के निर्धारित जिलों में बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल के चार पहिया वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • पुराने हल्के/मध्यम मालवाहक वाहनों और दिल्ली से बाहर पंजीकृत गैर-बीएस-VI डीजल वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

निर्माण व ध्वस्तीकरण पर रोक
  • सभी गैर-जरूरी निर्माण, खुदाई, ध्वस्तीकरण और सड़क निर्माण गतिविधियों को निलंबित कर दिया गया है।
  • स्टोन क्रशर (पत्थर तोड़ने वाली मशीनों) और खनन कार्यों को तुरंत बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्कूलों में हाइब्रिड मॉडल
बच्चों को जहरीली हवा से बचाने के लिए कक्षा 5 तक के प्राथमिक स्कूलों को हाइब्रिड मोड- ऑनलाइन और ऑफलाइन कक्षाओं का विकल्प में चलाने का निर्देश दिया गया है।

दफ्तरों के लिए वर्क-फ्रॉम-होम और 50% उपस्थिति
दिल्ली और एनसीआर के पांच जिलों में सरकारी व निजी दफ्तरों को 50% कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ काम करने और बाकी कर्मचारियों को घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) कराने के निर्देश दिए गए हैं।

दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने की कवायद। - फोटो : अमर उजाला
सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा
निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए मेट्रो के अतिरिक्त फेरे शुरू किए गए हैं और अतिरिक्त बसें तैनात की गई हैं। इसके अलावा निजी वाहनों को कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने के प्रावधान भी शामिल हैं।

धूल नियंत्रण और सफाई अभियान
सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग (मशीनों से सफाई), पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के जरिए धूल दबाने के उपायों को तेज किया गया है।

पटाखों पर सुप्रीम कोर्ट के नियम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत 7 और 8 नवंबर को केवल प्रमाणित 'ग्रीन पटाखों' के लिए सीमित समय तय किया गया है, जबकि 9 नवंबर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध दोबारा लागू हो जाएगा।

नागरिक सहयोग की अपील
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने हवा की गति लगभग शून्य होने की आशंका के बीच नागरिकों से इन नियमों का सख्ती से पालन करने और सहयोग करने का अनुरोध किया है।
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