दिल्ली आबकारी नीति मामले में जेल से बाहर आने के बाद भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता के. कविता बुधवार को अपने गृह नगर हैदराबाद पहुंचीं। यहां पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। उन पर पुष्पवर्षा की। कार्यकर्ताओं का उत्साह देख के. कविता भी उत्साहित नजर आईं।
बीआरएस नेता के. कविता ने कहा कि इतिहास ने बार-बार साबित किया है कि सत्य की जीत होती है। मेरे मामले में भी इतिहास ने खुद को दोहराया है। सत्य की जीत होगी, न्याय की जीत होगी और हम राजनीतिक रूप से लड़ना जारी रखेंगे। कानूनी तौर पर हम लड़ेंगे। भारत हमेशा न्याय और सच्चाई के साथ मजबूती से खड़ा रहा है और मुझे पूरा विश्वास है कि मैं अपने मामले में बिल्कुल बेदाग निकलूंगीं।
इस दौरान उनके आवास के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं का हुजूम नजर आया। के. कविता के आवास पर पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने फूल बरसाए। साथ ही ढोल नगाड़ों पर जमकर डांस किया। इसके साथ ही मिठाई बांटी गई। के. कविता ने कार्यकर्ताओं का हाथ हिलाकर अभिवादन किया और आभार जताया। इसके बाद उन्होंने अपने भाई केटीआर को राखी भी बांधी।
बता दें कि दिल्ली शराब नीति घोटाले में के. कविता पांच महीने से भी ज्यादा समय तक न्यायिक हिरासत में थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनको जमानत दी है। जमानत के लिए दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की तरह के. कविता को भी दस-दस लाख रुपये का मुचलका भरना पड़ा और उन्हें अपना पासपोर्ट भी जमा करना पड़ा। के. कविता को जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि मामले से संबंधित साक्ष्य जुटा लिए गए हैं, लेकिन अब इस मामले की सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, लिहाजा आरोपी को तब तक के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता।
क्या है दिल्ली शराब नीति घोटाला
17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई नीति लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा।
इस शराब नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितता की शिकायतें आईं जिसके बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके साथ ही दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 सवालों के घेरे में आ गई। हालांकि, नई शराब नीति को बाद में इसे बनाने और इसके कार्यान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था।