भाजपा ने दिल्ली सरकार के शिक्षा में सुधार के दावे को हवा-हवाई बताया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में छात्रों को नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा में अपेक्षाकृत कमजोर छात्रों को फेल किया जा रहा है और इस प्रकार केवल मजबूत छात्रों को अगली कक्षा में ले जाकर बच्चों का पास प्रतिशत ज्यादा दिखाने की कोशिश हो रही है। पार्टी का यह जवाब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कमजोर छात्रों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा देने का एलान किया था।
प्रजा फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018-19 में दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ रहे नौवीं कक्षा के 1,16,149 छात्र दसवीं कक्षा में नहीं पहुंचे। माना जा रहा है कि ये छात्र नौवीं कक्षा की परीक्षा पास नहीं कर सके। इन्हें दसवीं कक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया। वर्ष 2019 की बारहवीं कक्षा में 94.24 फीसदी छात्र पास हुए थे। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री ने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया था।
लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि ये आंकड़े दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं क्योंकि ये आंकड़े उन्हीं छात्रों के दसवीं में पास हुई संख्या का लगभग 45 फीसदी है। यानी इस तरह उन छात्रों के 55 फीसदी ग्यारहवीं कक्षा पास नहीं कर सके। ये आंकड़े दिल्ली सरकार के शिक्षा के दावे पर सवाल उठाते हैं।
15 नवंबर 2019 को दिल्ली के शिक्षा विभाग ने एक आरटीआई के जवाब में कहा है कि वर्ष 2017-18 में 73,561 छात्र फेल हुए थे। इनमें से 35,534 छात्रों को दुबारा प्रवेश मिला था, जबकि 52 फीसदी छात्र उसी कक्षा में दोबारा प्रवेश नहीं पा सके। इसमें स्कूलों के द्वारा छात्रों को प्रवेश देने से इनकार करने से लेकर पढ़ा़ई छोड़ने वाले छात्र भी शामिल हो सकते हैं।