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भाजपा का आरोप, केजरीवाल की गलत शिक्षा नीति से दांव पर लगा छात्रों का भविष्य!

Tue, 31 Dec 2019 03:59 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : ANI (File)
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भाजपा ने दिल्ली सरकार के शिक्षा में सुधार के दावे को हवा-हवाई बताया है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में छात्रों को नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा में अपेक्षाकृत कमजोर छात्रों को फेल किया जा रहा है और इस प्रकार केवल मजबूत छात्रों को अगली कक्षा में ले जाकर बच्चों का पास प्रतिशत ज्यादा दिखाने की कोशिश हो रही है। पार्टी का यह जवाब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कमजोर छात्रों को मुफ्त कोचिंग की सुविधा देने का एलान किया था।  

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भाजपा से जुड़े शोध संस्थान पीपीआरसी के निदेशक सुमीत भसीन ने अमर उजाला से कहा कि आरटीआई से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि नवीं और ग्यारहवीं कक्षा में बच्चों को रोका जा रहा है। यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि इस तिकड़म के बाद भी दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे इतने भी अंक नहीं ला पा रहे हैं कि उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रवेश मिल सके।  

रिपोर्ट का दावा

प्रजा फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018-19 में दिल्ली सरकार के स्कूलों में पढ़ रहे नौवीं कक्षा के 1,16,149 छात्र दसवीं कक्षा में नहीं पहुंचे। माना जा रहा है कि ये छात्र नौवीं कक्षा की परीक्षा पास नहीं कर सके। इन्हें दसवीं कक्षा में प्रवेश नहीं दिया गया। वर्ष 2019 की बारहवीं कक्षा में 94.24 फीसदी छात्र पास हुए थे। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री ने इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया था।

लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि ये आंकड़े दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं क्योंकि ये आंकड़े उन्हीं छात्रों के दसवीं में पास हुई संख्या का लगभग 45 फीसदी है। यानी इस तरह उन छात्रों के 55 फीसदी ग्यारहवीं कक्षा पास नहीं कर सके। ये आंकड़े दिल्ली सरकार के शिक्षा के दावे पर सवाल उठाते हैं।

एडमिशन नहीं दे रही आप सरकार

15 नवंबर 2019 को दिल्ली के शिक्षा विभाग ने एक आरटीआई के जवाब में कहा है कि वर्ष 2017-18 में 73,561 छात्र फेल हुए थे। इनमें से 35,534 छात्रों को दुबारा प्रवेश मिला था, जबकि 52 फीसदी छात्र उसी कक्षा में दोबारा प्रवेश नहीं पा सके। इसमें स्कूलों के द्वारा छात्रों को प्रवेश देने से इनकार करने से लेकर पढ़ा़ई छोड़ने वाले छात्र भी शामिल हो सकते हैं।

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इसी प्रकार इसी सत्र में दसवीं की कक्षा में 42,503 छात्र फेल हुए थे। इनमें 91 फीसदी छात्रों को उसी कक्षा में दोबारा प्रवेश नहीं मिला। इसी सत्र के ग्यारहवीं कक्षा में 28,806 छात्र फेल हो गए थे। इनमें से 58 फीसदी छात्रों को दोबारा प्रवेश नहीं मिला। इसी प्रकार बारहवीं कक्षा में 10,566 छात्र असफल हुए थे। इनमें केवल 943 या नौ फीसदी छात्रों को दोबारा प्रवेश मिला जबकि 91 फीसदी छात्रों को विभिन्न कारणों से दोबारा प्रवेश नहीं मिला।

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