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Kerala Kidney Transplant Case: ऑपरेशन में देरी से गुर्दा प्रत्यारोपण के मरीज की मौत, स्वास्थ्य विभाग ने दो डॉक्टरों को किया निलंबित

Tue, 21 Jun 2022 12:27 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, तिरुवनंतपुरम।

सार

राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने यहां मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग के प्रमुखों को किडनी प्रत्यारोपण की घटना में समन्वय की कमी के लिए जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है।
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केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज - फोटो : ANI
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विस्तार
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केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गुर्दा प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) के एक मरीज की सोमवार को मौत हो गई। आरोप है कि ऑपरेशन में करीब चार घंटे की देरी के कारण मरीज की जान गई है जिसके बाद सरकार ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं।

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नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग के प्रमुखों को किया निलंबित
राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने यहां मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल के नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग के प्रमुखों को किडनी प्रत्यारोपण की घटना में समन्वय की कमी के लिए जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है।

सूत्रों ने बताया कि एर्नाकुलम में एक 34 वर्षीय ब्रेन डेड डोनर के शरीर से निकाली गई किडनी को रविवार शाम करीब चार बजे तिरुवनंतपुरम लाया गया था। कुछ मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया है कि किडनी के तिरुवनंतपुरम अस्पताल पहुंचने के बाद भी किडनी प्रत्यारोपण में लगभग चार घंटे की देरी हुई।
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अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि मरीज की सोमवार सुबह मौत हो गई। इसके बाद राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) को मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद, जॉर्ज ने कहा कि एर्नाकुलम से लाई गई किडनी के पहुंचने के बाद नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग में समन्वय की कमी के संदेह में दोनों विभाग प्रमुखों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

मंत्री ने कहा, "अस्पताल के अधिकारियों ने शिकायत की है कि जब किडनी एर्नाकुलम से आया, तो अस्पताल के कर्मचारियों के अलावा कुछ अन्य लोग किडनी वाले बॉक्स को एंबुलेंस से अस्पताल के अंदर ले गए। इसकी जांच की जाएगी।" टेलीविजन चैनलों द्वारा प्रसारित एक वीडियो में दो अज्ञात व्यक्तियों को एंबुलेंस के रुकते ही किडनी प्राप्त करते हुए और उसे अस्पताल के अंदर ले जाते हुए दिखाया गया है।

मंत्री ने कहा कि अस्पताल के संबंधित अधिकारी उस समय वहां नहीं थे जब एंबुलेंस अंग लेकर अस्पताल के पोर्टिको पहुंची थी। उन्होंने कहा कि निकाली गई किडनी रविवार शाम करीब चार बजे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहुंची थी। जॉर्ज ने कहा, "दोपहर करीब 2.30 बजे मरीज का मिलान हुआ और उसे विभिन्न परीक्षणों और चिकित्सकीय जांचों के लिए भर्ती कराया गया। उसके बाद शाम करीब चार बजे उसे डायलिसिस के लिए ले जाया गया। आम तौर पर इसमें चार घंटे लगते हैं।"

उन्होंने कहा, "उनका डायलिसिस लगभग आठ बजे समाप्त हो गया था और 8.15 बजे ऑपरेशन थियेटर में स्थानांतरित कर दिया गया था और ऑपरेशन जल्द ही शुरू हो गया था। यह रिपोर्ट के अनुसार है। यह सामान्य प्रक्रिया है।" उन्होंने कहा लगभग आठ घंटे में प्रत्यारोपण पूरा हो गया था, लेकिन सोमवार सुबह मरीज का निधन हो गया। मंत्री ने कहा कि मौत की असली वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।

विपक्ष ने सख्त कार्रवाई की मांग की
वहीं विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने वाम सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री मामले में जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस बीच, राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी इस संबंध में एक मामला दर्ज किया है और मेडिकल शिक्षा निदेशक को घटना की जांच करने और चार हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। दो मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की शिकायत पर आयोग ने जांच का निर्देश दिया है। शिकायत में कहा गया है कि गुर्दे को एक एंबुलेंस में "ग्रीन कॉरिडोर सिस्टम" के माध्यम से रविवार को ढाई घंटे में एर्नाकुलम से तिरुवनंतपुरम लाया गया था।

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