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प्रधानमंत्री के पोस्टर पर बवाल: 220 वर्ष पुराने आयुध कारखानों को सात कंपनी बनाकर देश को समर्पित करेगा रक्षा उत्पादन विभाग!

सार

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईईडीएफ' के महासचिव सी. श्रीकुमार ने कहा,  रक्षा उत्पादन विभाग को यह भी याद नहीं रहा कि ये वही कारखाने हैं, जिन्होंने भारतीय सेना को पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध, बांग्लादेश लिब्रेशन वॉर, करगिल की लड़ाई और लद्दाख जैसी झड़पों में साजो-सामान सप्लाई किया था...
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पीएम मोदी का पोस्टर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले 'रक्षा उत्पादन विभाग' द्वारा जारी विज्ञापन ने बवाल मचा दिया है। इस विज्ञापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो छपा है। उसमें लिखा है कि एक अक्तूबर को सात नई डिफेंस कंपनियां राष्ट्र को समर्पित की जाएंगी। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईईडीएफ' के महासचिव सी. श्रीकुमार ने कहा, ये तो सरासर धोखा है। ये सात कंपनियां नई नहीं हैं, बल्कि 120 साल से लेकर 220 साल पुराने 41 आयुध कारखाने हैं। रक्षा उत्पादन विभाग यह भूल गया है कि इन कारखानों में आज भी 76 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों द्वारा इस बाबत 23 सितंबर को रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर, भ्रमित करने वाले उस विज्ञापन को तुरंत प्रभाव से हटाने की मांग की गई है। सभी आयुध कारखानों के कर्मचारी 'रक्षा उत्पादन विभाग' द्वारा आयोजित किए जाने वाले समारोह के विरोध में एक अक्तूबर को दोपहर का खाना नहीं खाएंगे।

विदेशी हथियार निर्माता खुश

अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ 'एआईईडीएफ' के महासचिव सी. श्रीकुमार ने बताया, देश में इससे ज्यादा शर्मनाक स्थिति और क्या हो सकती है। राष्ट्र की धरोहर 220 साल पुराने आयुध कारखानों को एक पल में भुला दिया गया। रक्षा उत्पादन विभाग को यह भी याद नहीं रहा कि ये वही कारखाने हैं, जिन्होंने भारतीय सेना को पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध, बांग्लादेश लिब्रेशन वॉर, करगिल की लड़ाई और लद्दाख जैसी झड़पों में साजो-सामान सप्लाई किया था। बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट की 16 जून को हुई बैठक में भारतीय रक्षा का चौथा बाजू कहे जाने वाले 220 साल पुराने आयुध कारखानों को सात कंपनियों में विभाजित कर दिया गया था। सरकार की लंबे समय से इन कारखानों पर नजर थी। सरकार के इस फैसले से प्राइवेट कंपनियां और विदेशी हथियार निर्माता खुश हो रहे हैं। वजह, प्राइवेट कंपनियां अभी तक 41 आयुध कारखानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रही थीं। अब प्राइवेट कंपनियों के आने का रास्ता साफ हो गया है। महेंद्रा, टाटा और एलएंडटी जैसी निजी कंपनियां रक्षा उत्पादन क्षेत्र में उतर रही हैं।

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दो लाख करोड़ रुपये की जमीन हथियाने की तैयारी!

आयुध कारखानों को सात कंपनियों में तब्दील करने के बाद आर्मी, एयरफोर्स और नेवी की ओर से इन कारखानों को डायरेक्ट काम नहीं मिलेगा। बतौर श्रीकुमार, सरकार चाहती है कि प्राइवेट कंपनियां इन कारखानों को टक्कर दें। अब यह व्यवस्था कर दी गई है कि टेंडर प्रक्रिया में प्राइवेट कंपनियां भी शामिल होंगी। सरकार का मकसद है कि जल्द से जल्द इन कारखानों को प्राइवेट हाथों में सौंप दिया जाए। इन कारखानों के पास दो लाख करोड़ रुपये की जमीन है, उसे हथिया लिया जाए। एयर इंडिया को बेचने में सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वजह, वह एक कंपनी है। सरकार ने 41 कारखानों को सात कंपनियों में बांट दिया है। इससे सरकार को इन्हें बेचने में आसानी होगी। सरकार का यह कदम इंडियन डिफेंस के रणनीतिक कौशल और प्रबंधन के साथ खिलवाड़ है। रक्षा उत्पादन सचिव को भेजे गए पत्र में एआईडीईएफ, आईएनडीडब्लूएफ, एनपीडीईएफ और बीपीएमएस जैसे कर्मचारी संगठनों ने कहा है, विभाग का यह एक भ्रामक कदम है। देश की जनता को गुमराह किया जा रहा है। यह लोगों के साथ छलावा है। जो कारखाने 220 साल से चल रहे हैं, उन्हें कंपनी बनाकर सरकार नए सिरे से उनका उद्घाटन कर रही है।

दो-तीन हजार रुपये स्टाइपेंड देकर ट्रेनिंग

कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले चार-पांच साल से इन कारखानों को नौकरी नहीं दी जा रही है। अप्रेंटिस की ट्रेनिंग दी जाती है, मगर नियुक्ति पत्र नहीं मिलता। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में 103 अप्रेंटिस की जॉब वाले युवाओं को नियुक्ति पत्र के लिए भूख हड़ताल करनी पड़ी। दूसरे कारखानों में भी यही हाल है। युवाओं को दो-तीन हजार रुपये स्टाइपेंड देकर ट्रेनिंग कराई जाती है, लेकिन उन्हें भर्ती नहीं किया जा रहा। केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल की आड़ में 220 साल पुराने कारखानों को सात कॉरपोरेशन में तब्दील कर दिया। पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर इस तरह के सौदे के खिलाफ थे। वे आयुध कारखानों के मौजूदा स्वरूप को ही आगे बढ़ाना चाहते थे। इन कारखानों के पास जो दो लाख करोड़ रुपये की ज़मीन है, उस पर सरकार के करीबी लोगों की नजर है। सरकार अपने चहेते उद्योगपतियों को यह जमीन कोड़ियों के भाव दिलाने के लिए प्रयासरत है। बहुत से कारखाने ऐसे हैं, जिसके लिए किसानों और आदिवासियों ने अपनी जमीन दी है। आयुध निर्माणी को कंपनी में तबदील करना सरासर गलत है। रक्षा क्षेत्र पर इसके विपरीत परिणाम देखने को मिलेंगे।
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