उन्होंने कहा कि सुरक्षा पहले का सिद्धांत भारत पहले से आता है। इस देश की सीमाओं के अंदर काम करने वाले सभी लोग चाहे वे वैज्ञानिक हों, व्यवसायी हों, किसी पेशे से जुड़े व्यक्ति हों या सरकार चलाने वाले हों, ऐसा करने में सक्षम हैं क्योंकि हमारे बहादुर सैनिक राष्ट्रीय गौरव की मजबूत भावना के साथ हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आप और मैं ‘भारत पहले’ के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति हैं। यदि ‘भारत पहले’ का मार्ग अपनाया जाए तो सुरक्षा भी पहले आती है। इसलिए, ‘सुरक्षा पहले’ की अवधारणा भारत पहले की अवधारणा के साथ आती है।
उन्होंने कहा कि एक सैनिक का कर्तव्य और जिम्मेदारी अद्वितीय होती है क्योंकि वह हर दिन मौत का सामना करता है और जानता है कि दुश्मन की गोली कभी भी, कहीं से भी आ सकती है। यह जानते हुए भी वे पूरे दिल और आत्मा से सीमाओं की रक्षा करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे सैनिकों के मन में इस देश और देश के लोगों की सुरक्षा के प्रति प्रेम की भावना है। उनके भीतर भी राष्ट्रीय स्वाभिमान की प्रबल भावना है। समाज के रूप में हम सामूहिक रूप से अपने सैनिकों के ऋणी हैं।