रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए डेफकनेक्ट सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, एयर चीफ मार्शल विवेक आर चौधरी और रक्षा सचिव गिरिधर अरामाने भी शामिल हुए।
स्वदेशीकरण की जरूरत: राजनाथ सिंह
राजनाथ सिंह ने इस सेमिनार को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा, "कोई भी देश सर्वोत्तम तकनीक साझा नहीं करता है। दूसरे देशों से प्राप्त तकनीक का भी हमारे सीखने से कोई संबंध नहीं होता है। यह तभी हो सकता है जब हम इसे स्वदेशी तरीके से विकसित करें।"
उन्होंने आगे कहा, "हम युवाओं को नए विचार लाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित किया है। रक्षा क्षेत्र में नवीनीकरण और तकनीक को बढ़ावा देने के लिए इनोवेशन ऑफ डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) लाया गया है। मैं रक्षा उत्पादन विभाग को आईडीईएक्स (एडीआईटीआई) योजना के साथ विकास शुरू करने के और इस नाम के लिए बधाई देना चाहता हूं, जिसका अर्थ है देवताओं की मां।"
राजनाथ सिंह ने कहा कि निजी क्षेत्र को फलने-फूलने देने के लिए एक मंच की आवश्यकता है। उस मंच के लिए हमें कानून-व्यवस्था, कर्मचारी, कानून का शासन और विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है।
घरेलू रक्षा उत्पादन पर बोले रक्षा मंत्री
केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘हम रणनीतिक स्वायत्तता तभी बरकरार रख पाएंगे जब हथियार और साजो-सामान हमारे देश में, हमारे अपने लोगों द्वारा बनाए जाएं। हमने इस दिशा में काम किया और हमें सकारात्मक परिणाम भी दिखे।’’ राजनाथ सिंह ने आगे बताया, ‘‘वर्ष 2014 के आसपास, हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 44,000 करोड़ रुपये था, आज हमारा घरेलू रक्षा उत्पादन एक लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर गया है और यह लगातार बढ़ रहा है।’’
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत जैसा विशाल देश किसी भी महत्वपूर्ण क्षेत्र में आयात पर निर्भर नहीं रह सकता। अगर हम सैन्य साजो-सामान और हथियारों के आयात पर निर्भर रहेंगे तो यह निर्भरता हमारी रणनीतिक स्वायत्तता के लिए घातक हो सकती है